सावन और सावन सोमवार व्रत का उद्यापन करने के लिए शास्त्रों में कुछ विधि-विधान बताए गए हैं। इन नियमों का पालन कर व्रत पूर्ण होने पर उद्यापन या परायण जरूर करना चाहिए। अपने व्रत प्रभु के चरणों में अर्पित करने का तरीका है उद्यापन। इस बार 26 अगस्त को पूर्णिमा है। इस दिन सावन का महीना समाप्त हो रहा है। ऐसे में चतुर्थी तिथि यानी 25 अगस्त को व्रत का उद्यापन करना फलदायी होगा। यहां जानें, उद्यापन करने का सही तरीका और इसका महत्व…

किसी भी व्रत का समय पूरा होने के बाद प्रभु स्मरण के साथ जो अंतिम पूजा की जाती है, वही उस व्रत का उद्यापन कहलाता है। सावन का महीना समाप्ति की ओर है, ऐसे में सावन के व्रत करनेवाले भक्त और सावन सोमवार के व्रत करनेवाले भक्त अब व्रत के उद्यापन की तैयारी करना शुरू कर सकते हैं। व्रत पूर्ण होने के बाद उद्यापन या समापन करना बहुत जरूरी होता है। तभी व्रत पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है। आइए, जाने सावन के व्रत का उद्यापन करने का तरीका…

यदि आप अपने व्रत का उद्यापन पुरोहित जी से न कराकर खुद करना चाहते हैं तो 25 अगस्त को चतुर्थी तिथि के अवसर पर सुबह के समय दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाएं। गणपति की आरती के साथ पूजा शुरू करें। हूम या हवन करें, इसमें काले तिल का प्रयोग करें। आप महामृत्युंज मंत्र 1,2,5 या 7 मालाओं का जप अपनी श्रद्धानुसार कर सकते हैं। पूजा के बाद किसी जरूरतमंद को वस्त्रों या दक्षिणा का दान दें।

अगर आपने पूरे महीने सावन का व्रत किया है या केवल फलाहार लिया है तो आप भी 25 अगस्त को व्रत का उद्यापन कर सकते हैं। आपको आज पूजा और हवन के बाद ही कुछ खाना है।

उद्यापनवाले दिन स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनना उचित होता है। इन्हीं वस्त्रों में पूजा करानी चाहिए।

पूजा के लिए एक चौकी या वेदी तैयार करें। इसे केले के पत्तों और फूलों से सुंदर तरीके से सजाएं।

स्वयं या पुरोहित जी द्वारा इस चौकी पर भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती, गणपति, कार्तिकेय,नंदी और चंद्रदेव की प्रतिमा स्थापित करें। इन्हें गंगाजल से स्नान कराने के बाद चंदन, रोली और अक्षत का टीका लगाएं।

फूल-माला अर्पित करें और पंचामृत का भोग लगाएं। भोलेनाथ को सफेद फूल अतिप्रिय हैं। सफेद मिठाई अर्पित करें।

शिव मंदिर में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी,गंगाजल का पंचामृत अर्पित करें। बिल्व पत्र, धतूरा और भांग चढ़ाएं।

अपनी हर समस्या के समाधान और मन्नत को पूरा करने के लिए काले तिल डालकर शिवलिंग पर 11 लोटे जल अर्पित करें।

पूजा के बाद भोजन ग्रहण करें। उद्यापन के दिन भी आपको एक समय ही भोजन करना है। रात में जमीन पर बिस्तर लगाकर सोना है।