बिलासपुर। कांग्रेसियों पर लाठी चार्ज के बाद उल्टे घायल कांग्रेसियों के खिलाफ एक साथ तीन-तीन आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिसकर्मियों का आरोप है कि कांग्रेसियों ने गाली-गलौज, दुर्व्यवहार करते हुए डंडे से हमला किया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि रैली में कांग्रेसियों के पास डंडे कहां से आए।
एक ओर कांग्रेस भवन में घुसकर कांग्रेसियों को घसीट-घसीटकर बेरहमी से पिटाई की गई। इस घटना के बाद पुलिस अफसरों ने गंभीर लापरवाही व बर्बरता को छिपाने के लिए उल्टे कांग्रेसियों के खिलाफ एक नहीं तीन-तीन आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया।

उन पर बलवा और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप है। कांग्रेसियों की रैली में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कचरा लेकर निकले थे। इसके बाद राजेंद्र नगर चौक में पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

इस बीच कांग्रेसी पुलिस को चकमा देकर मंत्री बंगले तक पहुंच गए और कचरा डालकर लौट गए। फिर कांग्रेसी अपना कार्यक्रम समाप्त कर कांग्रेस भवन चले गए। कांग्रेस भवन पहुंचते ही एडिशलन एसपी नीरज चंद्राकर बड़ी संख्या में बल लेकर पहुंच गए और कांग्रेसियों को गिरफ्तारी देने की चेतावनी दी। विरोध करने व जबरिया गिरफ्तारी देने से मना करने पर डंडे बरसाना शुरू कर दिया गया। वायरल वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि कांग्रेसियों को घसीट-घसीट डंडे बरसाए जा रहे हैं।

पुलिस का रवैया हिंसात्मक नजर आ रहा है। जबकि पुलिस की तरफ से दर्ज की गई एफआइआर कांग्रेसियों पर धक्कामुक्की करते हुए डंडे से मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।

गिरफ्तारी के बाद रिहाई क्यों 

सवाल यह भी उठता है कि एडिशनल एसपी नीरज चंद्राकर ने इस घटना के बाद बयान दिया कि कांग्रेसियों ने पुलिसकर्मियों से बदसलूकी की थी, जिसकी एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कांग्रेस भवन गए थे।

वहां भी उन्होंने दुर्व्यवहार किया, तब मजबूर होकर हल्के बल का प्रयोग किया गया। पुलिस ने जब उन्हें गैरजमानतीय प्रकरण में गिरफ्तार किया तब धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर रिहाई की औपचारिकता क्यों निभाई। उनके खिलाफ तो पहले ही आपराधिक प्रकरण दर्ज था। उस प्रकरण में उनकी गिरफ्तारी दर्शाकर उन्हें जेल क्यों नहीं भेजा गया।