इससे पहले भी हमने बहुत से चमत्कारों की पड़ताल की है. बहुत से अंधविश्वासों की पोल खोली है लेकिन यक़ीन मानिए इस कहानी को समझना हमारे लिए भी एक चुनौती बन गया. जब हमने लोगों को नारियल पर घूमते हुए देखा, तो लगा जैसे ये सबकुछ कोई बहुत बड़ा ढोंग है. एक पाखंड, जिसके जरिए लोगों को बरसों से बेवकूफ बनाया जा रहा है. शुरुआत में लगा कि जैसे नारियल पर बैठे लोग खुद को जानबूझकर घुमा रहे हैं लेकिन जैसे जैसे हम इस अंधविश्वास को समझने की कोशिश करते रहे, हम भी पहेली में उलझते चले गए.

हमने इस चमत्कार की हर मुमकिन तरह से पड़ताल की. यहां तक कि इस चमत्कार को खुद आजमा कर भी देखा, लेकिन नारियल के घूमने की वजह समझ में नहीं आई. हमने जो तस्वीरें कैद की हैं, वीडियो में उन्हें ज़रा गौर से देखिए और इस चमत्कार की पड़ताल का इंतज़ार कीजिए, जिसकी तलाश में हम भी चक्कर खा गए.

आप सोच रहे होंगे कि ये सब कुछ मज़ाक है. सिर्फ मंत्र बोलने से नारियल कैसे घूम सकता है? सिर्फ अगरबत्तियां सुलगाने से ज़मीन में पानी का पता कैसे लग सकता है? शायद ये सबकुछ आंखों का धोखा है या किसी बाबा का कोई पाखंड! हम भी इसी गलतफहमी में थे लेकिन तब तक, जब तक इस दावे को अपनी आंखों से नहीं देखा था. इस दावे की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की थी. इतना साफ है कि इस कहानी में जितनी हकी़क़त है उतना फ़साना भी लेकिन उस फर्क को समझने के लिए खेल को शुरुआत से देखना होगा जो शुरु होता है राजस्थान के एक खूबसूरत शहर जोधपुर से.

राजस्थान के इस इलाके में अगर लोगों को पानी का पता लगाना होता है तो वो विज्ञान पर कम भरोसा करते हैं बल्कि अपनी मान्यता के मुताबिक एक परम्परागत तरीके को अपनाते हैं और वो तरीका है ज़मीन पर नारियल घुमाकर पता लगाना कि कहां खोदने पर पानी निकलेगा लेकिन इसकी हकीकत क्या है और इस पूरी प्रथा का फसाना क्या है?


ये इलाका रेगिस्तान के बहुत करीब है. पानी की बेहद तंगी है. सिंचाई के लिए किसान ट्यूबवेल लगवाते हैं लेकिन ट्यूबवेल खेत के किस हिस्से में लगवाना है, इसके लिए न मशीनों की जरूरत पड़ती है, न इंजीनियर्स की. सहारा लिया जाता है एक बाबा का, लकड़ी की चौकी का, एक नारियल और कुछ अगरबत्तियों का.

जोधपुर में हमें जरूरत थी किसी ऐसे शख्स की, जो ट्यूबवेल के लिए बाबाओं की शक्तियों का सहारा ले रहा हो. तभी जानकारी मिली कि जोधपुर से चंद किलोमीटर दूर तहसील बावड़ी में ये आजमाइश होने वाली थी. इस इलाके में ज़मीन के नीचे छिपा पानी किसी ख़ज़ाने से कम नहीं है. किसानों के पास ज़मीन में पानी का पता लगाने के दो तरीके हैं. पहला वैज्ञानिक तरीका जो बेहद महंगा है और पानी मिलने की कोई गारंटी भी नहीं और दूसरा तरीका है बाबाओं का चमत्कार जो सस्ता भी है और पानी मिलने की गारंटी भी है.

गांव के आसपास पूछताछ की, तो हर जुबान पर उसी चमत्कार का दावा था. एक ग्रामीण ने कहा 'हम लोग तो नारियल ले कर, उसमें अगरबत्ती लेकर घूमते हैं. एक बंदा नारियल पर बैठाते हैं, जहां पर पानी होगा वहां नारियल पर बैठा आदमी ऑटोमैटिक घूमेगा'. एक और शख्स ने कहा कि '99% यही है यहां पर. साइं​टिफिक टेस्ट क्यों नहीं कराते हैं? नहीं कराते हैं क्योंकि पैसा लगता है और फिर जानकारी भी नहीं है पब्लिक को.

हमारी टीम गंगाणी गांव पहुंची, तो उस चमत्कार का दावा ठोंकते तमाम ट्यूबवेल दिखे. पता चला कि यहां सरकारी तरीके से बोरिंग करवाने का रिवाज ही नहीं है. एक ग्रामीण ने कहा कि 'हम लोग यहां नारियल घुमाने पर विश्वास ज्यादा करते हैं. जहां नारियल तेज घूमता है वहां ट्यूबवेल करवा लेते हैं'. शुरुआत में गांव के कई पढ़े-लिखे लोगों के लिए भी ये सब कुछ एक अंधविश्वास था लेकिन एक बार बाबाओं का करिश्मा आज़माया, तो राय बदल गई.

ऐसे की एक शख्स ने बताया कि 'पेशे से मैं शिक्षक हूं. हमने पिछले साइड में ट्यूबवेल लगवाई थी वहां पर पानी मिला, इधर पानी नहीं था, तो मेरे भी दिमाग में आया कि हम भी यहां पर ट्यूबवेल करवाएं. कुछ लोग ये गोटा घुमवाकर करवाते थे, तो मेरे दिमाग में नहीं बैठता कि भाई गोटा और इस पानी का क्या कनेक्शन हो सकता है. मैं अंधविश्वास में विश्वास नहीं करता हूं. मैंने ऐसे ही ट्यूबवेल करवाई, दो ट्यूबवेल खाली चली गई, एक बूंद पानी नहीं मिला. फिर मैंने सोचा कि हम भी ऐसा करते हैं, गोटा घुमवा लेते हैं. हमने वो गोटा घुमवाया तो जहां जहां वो प्वाइंट आता था, वहां गोटा ऑटोमैटिक घूमता था. मुझे शक था कि इसका पानी से क्या कनेक्शन होगा? फिर भी हमने वहां गाड़ी बुलवाई, बोरिंग करवाई तो पानी मिल गया.'

वीडियो में राजस्थान के जोधपुर जिले में एक ट्यूबवेल और खेत में लहलहाती फसल के पीछे भी यही राज़ है. इसके लिए कई दफा जतन करने पड़े. ये पता लगाने के लिए कि आखिर पानी कहां है? ताकि मेहनत और खुदाई ज़ाया न जाए. ये यहां की आम मान्यता है, नारियल घुमाकर ये बताया जाता है कि पानी कहां मिल सकता है. यहां भी यही हुआ और आखिरकार पानी खेतों में बह रहा है.

अब तक हमारी टीम ने जो सुना था, अब उसे खुद आजमाने की बारी थी. हमारी मुलाकात गांव के कुछ लोगों से हुई. बताया गया कि गंगाणी गांव में चमत्कार की वो महफिल आज भी सजेगी जिसके लिए हम मिलने पहुंचे इलाके के मशहूर बाबा चंद्राराम से. भजन की महफिल सजी थी. आसपास बाबा चंद्राराम के भक्तों की भीड़ जुटी थी. भजनों से सुर थमे तो पास के एक हनुमान मंदिर में बाबा के मंत्रों का जाप शुरु हुआ. बताया गया बाबा चंद्राराम को बालाजी यानी महाबलि हनुमान की सिद्धि हासिल है और अब से कुछ देर बाद वो जो भी चमत्कार करेंगे, सब हनुमान की महिमा होगी.

पूजा-पाठ खत्म हुआ, तो हम भी बाबा चंद्राराम के साथ गांव के एक खेत की ओर रवाना हुए. इस खेत के मालिक ने ज़मीन में पानी का सही ठिकाना तलाशने के लिए ही बाबा को बुलवाया था. बाबा चंद्राराम ने आसन सजा लिया. उनके सहयोगी बाबा लालाराम ने एक हवन कुंड तैयार किया और पूजा पाठ की तैयारी शुरु हो गई. सामने एक लकड़ी की चौकी रखी गई. चौकी पर कुछ फूल थे और फूलों के बीच एक नारियल रखा हुआ था.

चमत्कार का खेल बस शुरु होने वाला था. जौहरी लाल के खेत में अब उनके परिवार के एक शख्स अगरबत्ती लेकर खड़े थे. ये अगरबत्ती लेकर घूमेंगे. जहां भी पानी का स्रोत ज्यादा होगा नारियल पर बैठा हुआ इन्हीं के परिवार का सदस्य उतनी तेज से घूमने लगेगा. किसान के परिवार के ही एक सदस्य को नारियल पर बैठाया गया. नारियल पर बैठने का भी एक खास तरीका था. उस शख्स ने नारियल को पैरों के पंजे से दबाया और संतुलन बनाकर शरीर का सारा बोझ उस नारियल पर डाल दिया.

परिवार का दूसरे सदस्य हाथों में अगरबत्तियां लेकर खेतों की तरफ निकल पड़ा. दावे की मानें तो ये शख्स एक सेंसर की तरह काम करेगा. हाथों में अगरबत्ती लिए वो शख्स खेत के अलग अलग हिस्सों में चहलकदमी करने लगा. कैमरे की निगाहें इस चौकी पर टिकी थीं. बेकरारी इस बात की थी, कि क्या ये नारियल वाकई घूमेगा? लेकिन तभी एक हैरतअंगेज तस्वीर दिखी. वो नारियल वाकई घूमने लगा. एक बार तो ऐसा लगा जैसे वो शख्स अपने अंगूठे के सहारे जानबूझकर नारियल को घुमा रहा है लेकिन चंद पलों में ही ये शक दूर हो गया.

हमने नारियल पर बैठे शख्स से पूछा कि क्या आप खुद घूमने की कोशिश कर रहे हैं इस पर बैठकर? तो उसने कहा — नहीं, नारियल घूम रहा है. हमने कहा — आप पूरी ताकत से उसे दबाने की कोशिश कर रहे हैं? घूम रहा है नारियल, प्रेशर सा महसूस हो रहा है? फिर उसने कहा — मैं तो अपनी जगह पर बैठा हूं. उसका दावा था कि वह सिर्फ अपना संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे था लेकिन नारियल घूमता जा रहा था.

कभी नारियल की रफ्तार कम होती, तो कभी अचानक बढ़ जाती. ये तस्वीरें देखकर हम भी सन्न रह गए. इतना साफ था कि जिस कहानी को हम सिर्फ एक अंधविश्वास मानकर निकले थे, वो रहस्य इससे कहीं ज्यादा गहरा था. शेष अगले अंक में.