पंजाब में गुरदासपुर के मोहल्ला इस्लामाबाद में ऐसा कुछ हुआ, जिस पर सब हैरान है। घटना मंगलवार की है। बीरो देवी के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। परिजन विलाप कर रहे थे। विलाप करते हुए एक महिला का हाथ बीरो के शव पर पड़ा गया। इसके बाद बीरो देवी उठकर बैठ गईं। मधुमेह से पीड़ित बीरो की सांस सोमवार रात रुक गई थी। इसके बाद परिजन उन्हें सिविल अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने कह दिया, 'शी इज नो मोर, इन्हें वापस ले जाएं।'घर पर शव लाकर परिवार अंतिम संस्कार की तैयारियों में लग गया। आठ घंटे तक यह सब चलता रहा। रिश्तेदार आते विलाप करते। इसी बीच एक रिश्तेदार महिला ने विलाप करते जैसे ही अपने दोनों हाथ थोड़ा जोर से बीरो देवी की छाती पर रखे तो एकदम उसकी सांसें चलने लगीं। बीरो देवी उठकर बैठ गई। मौजूद लोग दंग रह गए।
उठते बीरो देवी ने कहा, 'मुझे गलती से ले गए थे। दूसरे मोहल्ले की महिला को लेकर जाना था। मैं तो स्वर्ग का चक्कर लगा वापस आ गई।' बीरो देवी के शरीर में दोबारा सांसें चलने के बाद परिजन उन्हें दोबारा सिविल अस्पताल ले गए। तीन दिन से उनका सिविल अस्पताल में उपचार चल रहा है। महिला के 'दोबारा जिंदा' होने की खबर सुन शहर भर से लोग उन्हें देखने सिविल अस्पताल आ रहे हैं।

रात को नहीं किया कोई टेस्ट : ज्योति बीरो देवी की बेटी ज्योति ने बताया कि सोमवार रात को जब वे लोग अस्पताल आए तो डॉक्टर ने कुछ देर चेकअप किया और उन्हें जवाब दे दिया। उस वक्त ईसीजी जैसा कोई टेस्ट नहीं हुआ था। डॉक्टर के कहने पर वे बीरो देवी को मृत मानकर वापस ले गए।
मरने के बाद जिंदा होने का कोई चांस नहीं : सिविल अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनजिदर सिंह बब्बर का कहना है कि जब तक ईसीजी की रिपोर्ट प्लेन न आए, तब तक मरीज को मृत घोषित नहीं कर सकते। बीरो देवी सिविल अस्पातल में पहले भी इलाज के आती रही हैं। हो सकता है महिला का शुगर का लेवल कम हो गया हो, जिस कारण वह बेसुध हो गई हों। मरने के बाद जीवित होने का कोई चांस नहीं रहता।