कोलकाता,  अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने चीन को दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा. इस दौरान उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीन की दखलदांजी और गीदड़भभकी को भी सिरे से खारिज कर दिया. भारत और चीन सीमा विवाद पर उन्होंने कहा कि भारत आज आर्थिक और सामरिक ताकत में चीन के समकक्ष है और ये बात वहां के हुक्मरानों को भी समझनी चाहिए. चीन की सरकार को यह सोचना चाहिए कि अब लड़ाई से कुछ हासिल होने वाला नहीं है.

दरअसल, चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना  हिस्सा बताता रहता है, जिसका भारत कड़ा विरोध करता आ रहा है. अरुणाचल से सटी सीमा पर भारत और चीन के बीच कई बार विवाद भी देखने को मिला है.

इसके अलावा पेमा खांडू ने देश की जनता को भी यह भरोसा दिलाया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2018 में अरुणाचल प्रदेश के सीएम से जब चीन के खतरे को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, 'वैसे तो इस मसले पर विदेश मंत्रालय को जवाब देना चाहिए, लेकिन एक अरुणाचली होने के नाते मैं यही कहूंगा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा था, है और रहेगा.' उन्होंने कहा कि आज हर एक अरुणाचली के अंदर ऐसी ही भावना है.

आज चीन के बराबर शक्तिशाली है भारतः खांडू

सीएम पेमा खांडू ने कहा कि आज भारत आर्थिक और सामरिक ताकत में चीन के समकक्ष है और ये बात चीन के हुक्मरानों को भी समझनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'देखिए जमाना बदल गया है. मुझे भी लगता है कि चीन की सरकार सोचेगी कि अब लड़ाई से कुछ होने वाला नहीं है. दोनों बड़े देश हैं और दोनों की शक्ति बराबर हैं. दोनों को मिलकर सीमा विवाद का समाधान निकालना चाहिए और बिजनेस रिलेशन को आगे बढ़ाना चाहिए.'

पेमा खांडू ने अरुणाचल प्रदेश की समस्याओं की ओर देश का ध्यान आकर्षित कराया. उन्होंने कहा कि नॉर्थ ईस्ट में अभी प्रेस भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है. नेशनल मीडिया भी गुवाहाटी तक सीमित रहती है और इसके चलते नॉर्थ ईस्ट को नुकसान हो रहा है. पेमा ने कहा कि नेशनल मीडिया की नॉर्थ ईस्ट में मौजूदगी बेहद जरूरी है, इससे सरकार भी अच्छे ढंग से काम करेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी.

मोदी सरकार आने के बाद कई बार केंद्रीय मंत्रियों ने अरुणाचल का दौरा किया

पेमा ने कहा कि 1987 में अरुणाचल बनने के बाद केन्द्र सरकार ने उसे विकसित करने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए. पेमा ने कहा कि नया राज्य बनने के बाद से 2014 तक 50 केन्द्रीय मंत्री भी अरुणाचल नहीं आए. वहीं 2014 से लेकर मौजूदा समय तक मोदी सरकार के मंत्रियों समेत प्रधानमंत्री की यात्रा 130 गुनी बढ़ी है. वहीं जहां 2014 से पहले कुल 4 प्रधानमंत्री अरुणाचल आए वहीं 2014 के बाद पीएम मोदी खुद दो यात्राएं कर चुके हैं.