लंदन : इस साल का शांति नोबेल सम्मान जीतने वाली ईराक की यजीदी महिला नादिया मुराद की कहानी एक बार फिर से चर्चा में है. उन्होंने पहली बार यूएन में अपनी कहानी बताकर सबको झकझोर दिया था. उसके बाद आधिकारिक रूप से ये बात सामने आई थी कि आईएसआईएस ने ईराक और सीरिया के कई हिस्सों में महिलाओं की जिंदगी को नरक से भी बदतर कर दिया था. उन्होंने उस दर्द को साझा करते हुए मीडिया को बताया कि किस तरह से आईएस ने उन जैसी हजारों लड़कियों का शोषण किया. नादिया ने कहा, ये कहानी ही उन आतंकियों के खिलाफ उनका सबसे बड़ा हथियार बनी.

नादिया ने कहा, ''आईएसआईएस के गढ़ में रोजाना रोजाना रात में महिला दासियों का बाजार लगता था. किसी मकान के निचले हिस्से में भारी हंगामे वाली जगह पर ये बाजार लगा होता था. यहां पर सारे आतंकी इकट्ठा होते. जैसे ही एक आतंकी कमरे में घुसते वहां पर मौजूद सारी लड़कियां बुरी तरह से चीखने लगतीं. ये दृश्य बिल्कुल वैसा ही होता, जैसे किसी धमाके के बाद का होता है. हालात इस कदर खराब होते कि कई लड़कियां वहीं फर्श पर उल्टियां करने लग जातीं. लेकिन इससे उन आतंकियों को कोई फर्क नहीं पड़ता. वह चारों ओर घूमकर कमरे में मौजूद सबसे खूबसूरत लड़की का चयन करते. उनका पहला सवाल होता, तुम्हारी उम्र क्या है. इसके बाद वह उस लड़की के बाल और मुंह देखते.  वह वहां मौजूद गार्ड से पूछते ये कुंवारी है. वह लड़कियों के दाम ऐसे लगाते, जैसे हम किसी दुकान पर सामान खरीदते हैं. इसके बाद आतंकी जहां मर्जी हमें छूते. उनके तेजी से हमारी छाती और पैरों पर घूमते, जैसे हम लड़कियां न होकर कोई जानवर हों.''

 

नादिया मुरान ने बताया, ''आतंकी लड़कियों को अपनी बहशी नजरों से हमें देखते और अरबी या तुर्कमान में हमसे सवाल करते. वह हमसे कहते चुप रहो. लेकिन उनके इतना कहने के बाद हमारी चीखें और दोगुनी हो जाती थीं. वह तेजी से मुझे छूने की कोशिश करते, इसके बाद हमारी चीख और दोगुनी हो जाती. उनके हाथों से मैं अपने आपको बचाने की पूरी कोशिश करती. कई लड़कियां फर्श पर ही अपने शरीर को बॉल की तरह मोड़ लेतीं, वहां मौजूद दूसरी लड़कियां एक दूसरे को घेरकर अपना और दूसरों का बचाव करतीं.''

 

नादिया ने आईएस की नीति का खुलासा करते हुए कहा, ''ईराक के उत्तरी हिस्से सिंजर में यजीदी लड़कियों को सेक्स दासी बनाना आईएस का कोई जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं था. इसके लिए उन्होंने पहले से ही प्लानिंग कर ली थी. वह किस तरह किसी यजीदी के घर पर धावा बोलेंगे. वहां से कौन सी लड़की को उठाएंगे और उसे अपनी दासी बनाएंगे. इसके लिए वह सबाया शब्द इस्तेमाल करते थे. वह अपने पसंदीदा सैनिकों को ये लड़कियां पेश करते थे. इतना ही नहीं आईएस अपनी मैगजीन में इस बात का प्रचार कर नए लोगों की भर्ती भी करता था. इसका मकसद नए लोगों को इसी लालच में अपने साथ जोड़ना होता था.''

 

खूंखार दिखने वाले आतंकी की बजाए दूसरे के साथ जाने के  लिए की जिद
यहां जिस आतंकी को जो लड़की चाहिए होती थी, वह उसका नाम रजिस्टर में लिखता, उसके साथ उस आतंकी का नाम भी लिखा जाता था. नादिया बताती हैं कि आईएस के इसी बाजार में एक बार उन्हें लगा कि उन्हें वहां के सबसे खूंखार दिखने वाले आतंकी सालवान के साथ जाना होगा. नादिया के अनुसार, वह साधारण लोगों की तरह भी नहीं दिखता था, वह एक दैत्य के समान था. उसके साथ जाने भर की बात सोचकर मैं सिहर उठी. कोई लड़की उससे अपना बचाव भी नहीं कर सकती थी, ऐसे में उसके साथ जाने का मतलब था मौत के मुंह में जाना. नादिया ने एक दूसरे आतंकी के पैर पकड़ लिए, उससे कहा कि वह उस राक्षस से बचाए, वह सालवान के साथ नहीं उसके साथ जाएगी. उस आतंकी ने सालवान से कहा, ये लड़की थोड़ी छोटी है. इसके बाद वह उस रजिस्टर के पास नादिया को लेकर गया. रजिस्टर में नाम पूछने पर देखा तो पता चला कि नादिया के साथ सालवान का नहीं किसी दूसरे आतंकी का नाम लिखा था.

नादिया कई दिनों तक आईएसआईएस की बंदी रहीं. 2015 में उन्होंने पहली बार संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपनी कहानी पूरी दुनिया को बताई. उन्होंने कहा, ये कहानी ही मेरे पास उन लोगों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार थी.