संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में बताया है कि वैश्विक तापमान को अगर डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक कम करने के लिए तुरंत आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो दुनिया को भयंकर दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे. इसमें चेतावनी दी गई है कि दो डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर पूरी दुनिया में समुद्री के स्तर में दस सेंटीमीटर की बढ़ोतरी होगी जिससे मूंगे की चट्टानों का नुकसान होगा और खाद्यान्न संकट गंभीर हो जाएगा.

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) ने कहा कि डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक तापमान को सीमित करने के लिए ‘‘दूरगामी और अभूतपूर्व बदलावों’’ की जरूरत होगी, जैसे बिजली के लिए कोयला का इस्तेमाल नहीं करना जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी. संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष जलवायु समिति आईपीसीसी ने कोरिया के इंचियोजन से रिपोर्ट जारी की जहां पिछले हफ्ते से सैकड़ों वैज्ञानिक और सरकारी प्रतिनिधि जुटे हुए हैं जहां वे विचार-विमर्श कर रहे हैं कि अगर वैश्विक तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस (या 2.7 डिग्री फारेनहाइट) बढ़ जाती है तो धरती और इसके निवासियों का क्या होगा.

आईपीसीसी के एक कार्यकारी समूह के सह-अध्यक्ष पनामाओ झाई ने कहा, ‘‘इस रिपोर्ट से एक मुख्य संदेश यह निकलता है कि हम एक डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान बढ़ने का दुष्परिणाम देख रहे हैं जिसमें मौसम काफी विषम होता जा रहा है, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और आर्कटिक समुद्र का बर्फ पिघलने जैसे अन्य बदलाव हो रहे हैं.’’

रिपोर्ट जारी होने के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ट्वीट किया कि वैश्विक तापमान को डेढ़ डिग्री तक कम करना असंभव नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इन सभी क्षेत्रों में हमें जलवायु पर अभूतपूर्व और सामूहिक कार्य करने होंगे.’’ रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि वैश्विक तापमान में आधा डिग्री की वृद्धि बड़ी बात होगी और इसके भयंकर दुष्परिणाम होंगे जो लोगों को अपनी दिनचर्या में दिखेगा.