इसमें कोई शक नहीं सेक्स, इमोशनली और फिजिकली दोनों ही तरीके से रिलैक्सिंग होता है। सेक्शुअल ऐक्ट के बाद शरीर से ऐसे केमिकल्स सीक्रेट होते हैं जिससे बॉडी मसल्स के साथ ही माइंड भी रिलैक्स हो जाता है। लेकिन सेक्स के बारे में जितनी बातें की जाती हैं, उससे जुड़े मिथक भी उतने ही ज्यादा हैं। तो सेक्स से जुड़े कुछ कॉमन मिथक और उनकी हकीकत के बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं...
यह एक आउटडेटेड और घिसी-पिटी बात है कि महिलाओं की कामेच्छा पुरुषों से कम होती है और महिलाओं में सेक्स के प्रति उतनी लालसा नहीं होती जितना पुरुषों में होती है। 2017 की एक स्टडी में यह बात सामने आयी थी कि 60 प्रतिशत महिलाएं अपने मेल पार्टनर से ज्यादा सेक्स करना चाहतीं थीं। लिहाजा पहला कदम उठाने के लिए पार्टनर का इंतजार क्यों करना? इस तरह के इन्हिबिशन्स यानी रूकावटों को दूर करें और अपनी सेक्शुऐलिटी को अपनाएं। आप भी चाहें तो सेक्स के दौरान लीड रोल में आ सकती हैं।
ऐसी मान्यता है कि फर्स्ट टाइम सेक्स के दौरान भयंकर दर्द होता है। वैसी महिलाएं जो वर्जिन होती हैं वे पेनिट्रेटिव सेक्स के बारे में सोचकर ही डर जाती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि हाइमन फटने के दौरान उन्हें काफी दर्द होगा। लेकिन कई बार महिलाओं को पता भी नहीं होता और ऐथलेटिक ऐक्टिविटी, मास्टरबेशन, स्विमिंग या फिर टैम्पून यूज करने के दौरान ही हाइमन फट चुका होता है। कुछ मामलों में जहां महिलाओं को बहुत ज्यादा दर्द होता है वह भी इसलिए होता है कि क्योंकि वे इस बात को पहले से मानकर बैठी होती है कि उन्हें बहुत दर्द होगा और ऐक्चुअल ऐक्ट के दौरान वे अपने मसल्स को टाइट कर लेती हैं।
स्लीप ऑर्गैज्म यानी नींद में ऑर्गैज्म महसूस करना जिसे साधारण शब्दों में वेट ड्रीम्स या स्वप्नदोष भी कहते हैं पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी महसूस होता है। पुरुषों के बाद जहां स्वप्नदोष का शारीरिक सबूत होता है वहीं महिलाओं के पास सिर्फ उसकी याद होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाएं स्वप्नदोष से नहीं गुजरतीं। महिलाओं में तो इस तरह के स्वप्न और ज्यादा इंटेंस यानी गहन होते हैं।
एक बार फिर पूरी तरह से गलत। जोहानस गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने रिसर्च में बताया था कि वैसी महिलाएं जो पॉर्न देखती हैं वे ज्यादा खुश रहती हैं। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि वैसे महिलाएं जिन्होंने अपनी लाइफ में एक्स-रेटेड मटीरियल कभी नहीं देखा उनकी तुलना में पॉर्न फिल्में देखने वाली महिलाओं की लाइफ सैटिस्फैक्शन रेटिंग ज्यादा थी। लिहाजा पॉर्न, इरॉटिका, सेक्सटिंग या कुछ और... जिस भी चीज से आपको उत्तेजना महसूस होती है उसका इस्तेमाल जरूर करें।