श्रीनगर: शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में 1.26 लाख मतदाताओं वाले जम्मू में मतदान प्रतिशत 80 प्रतिशत रहा, जबकि 2.20 लाख मतदाताओं वाले कश्मीर में मतदान कम हुआ. यहां केवल 3.4 प्रतिशत ही मत पड़े. अधिकारियों ने बताया कि राज्य में दूसरे चरण में, 3.47 लाख मतदाता, कुल 31.3 प्रतिशत मतदान हुआ. उन्होंने बताया कि पहले चरण में भी कश्मीर में केवल 8.3 प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में 65 प्रतिशत मत पड़े थे.

अधिकारियों ने बताया कि 19 वार्ड वाले श्रीनगर नगर निगम, यहां कुल 1.78 लाख मतदाता हैं, में केवल 2.3 प्रतिशत मत ही पड़े. जबकि 8,300 मतदाताओं वाले बांदीपोरा में 34.2 प्रतिशत मतदान हुआ. उन्होंने बताया कि उत्तर कश्मीर के सोपोर और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में क्रमश: 6.1 प्रतिशत और 1.1 प्रतिशत मतदान हुआ.

राज्य भर में कड़ी सुरक्षा के बीच 544 मतदान केंद्रों में शाम चार बजे तक मतदान हुआ. अगले चरण का चुनाव 13 और 16 अक्टूबर को होगा. 

राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव आतंकियों की धमकी और राज्य की दो बड़ी पार्टियों, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), के चुनाव बहिष्कार के बीच हो रहे हैं. दोनों दलों ने उच्चतम न्यायालय में संविधान के अनुच्छेद 35ए को कानूनी चुनौती देने के विरोध में चुनावों का बहिष्कार किया है. सरकार ने चुनाव के लिए निर्वाचन क्षेत्रों में छुट्टी की घोषणा की है ताकि मतदाता वोट डाल सकें.

अलगाववादियों द्वारा बुलाई हड़ताल का दिखा असर 
शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के खिलाफ अलगाववादियों द्वारा बुलाई हड़ताल से कश्मीर घाटी के चुनाव वाले क्षेत्रों में बुधवार को जनजीवन प्रभावित रहा. अधिकारी ने बताया कि घाटी के चुनाव वाले क्षेत्रों में दुकानें, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक संस्थान बंद रहे. शहर के कई इलाकों में भी दुकानें बंद रहीं. उन्होंने बताया कि एहतियाती तौर पर अधिकारियों ने शहर में इंटरनेट की गति भी कम कर दी है. अधिकारियों ने बताया कि चुनाव वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के साधन भी सड़कों से नदारद रहे लेकिन घाटी के अन्य इलाकों में इनकी आवाजाही सामान्य रही. 

संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) के अलगाववादियों ने मंगलवार को इलाके में बंद रखने की घोषणा की थी. जेआरएल में सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक शामिल हैं, जिन्होंने एक संयुक्त बयान में कहा था, ‘दूसरे चरण में जहां चुनाव होने हैं, वहां लोग इस नाटक से दूर रहकर, इसका बहिष्कार कर दिखाएंगे कि उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है.’