अरुषा (तंजानिया) : विश्व के बड़े-बड़े संगठनों के तमाम प्रयासों के बाद भी ज्यादातर मुल्कों में महिलाओं और लड़कियों के लिए आज भी हालात आसान नहीं हैं. खासकर अफ्रीकी देशों में तो महिलाओं के लिए ऐसे ऐसे नियम हैं, जो उनके जीवन के अंधेरे को कम करने की बजाए बढ़ाते हैं. ऐसा ही देश तंजानिया है. यहां युवतियों और महिलाओं के लिए जीवन कितना मुश्किल है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गर्भवती युवतियों को यहां स्कूल आने की अनुमति नहीं है. इसके लिए बाकायदा साल में दो बार उनका स्कूल में ही प्रैग्नेंसी टेस्ट होता है. अगर कोई युवती इस टेस्ट में पॉजिटिव आती है, तो उसे तुरंत स्कूल से निकाल दिया जाता है.

तंजानिया के किलिमंजारो और अरुषा क्षेत्रों सहित सभी जगहों पर ऐसे टेस्ट साल में दो बार किए जाते हैं और इन्हें सभी लड़कियों को देना अनिवार्य होता है. ये टेस्ट ग्रेड 8 से ऊपर की सभी लड़कियों को देना होता है. यहां की एक 19 वर्षीय लड़की ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, जब टेस्ट करना होता है उससे पहले एक महिला टीचर हम लड़कियों को एक कमरे में बुलाती है, वह हमारे पेट को छूती है. मुझे पता था कि मैं प्रैग्नेंट हूं, लेकिन फिर भी मैंने अपने पेट को दबाने की कोशिश की. लेकिन जैसे ही उन्हें मेरी प्रैग्नेंसी का पता चला मेरी पढ़ाई छूट गई.

2015 में पोम्बे मागुफिल के सत्ता में आते ही कड़े हुए नियम
महिलाओं युवतियों के लिए पढ़ाई संबंधी नियम मौजूदा राष्ट्रपति पोम्बे मागुफिल के सत्ता में आते ही कड़े कर दिए गए. इसके बाद से ही प्रैग्नेंट लड़कियों और युवतियों की पढ़ाई पर रोक लगा दी गई. पिछले साल जून में मागुफिल ने एक सभा में इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि गर्भवती युवतियों को पढ़ाई बिल्कुल इजाजत नहीं होगी. 2017 में इस पब्लिक रैली में उन्होंने कहा था, मेरे प्रशासन में प्रैग्नेंट युवतियों को पढ़ाई की इजाजत नहीं होगी. उन्हें वही जीवन चुनना होगा और बच्चे की देखभाल करनी होगी.

यूनिसेफ तंजानियां में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए लंबे समय से काम कर रहा है. photo : twitter

हालांकि आधिकारिक तौर पर अब तक ऐसे कोई रिकॉर्ड नहीं है कि तंजानिया में कितनी युवतियों को इस हालत में स्कूल छोड़ना पड़ता है. लेकिन इसी क्षेत्र में काम करने वाले एक अमेरिकी संस्था का दावा है कि हर साल यहां करीब 8000 से ज्यादा प्रैग्नेंट महिलाओं को स्कूल छोड़ना पड़ता है. मौजूदा सरकार से पहले जो सरकार तंजानिया में थी, उसने प्रैगनेंट महिलाओं को स्कूल आने की इजाजत दी थी, लेकिन मागुफिल सरकार ने इस  नियम को फिर से कड़ा कर दिया.

तंजानिया में ऐसे में उन लोगों की भी कमी नहीं है, जो इस टेस्ट को सही मानते हैं. अन्ना उलिंबोका नाम की नर्स कहती हैं कि ये टेस्ट अच्छा है. कई स्टूडेंट भी इसे सही मानती हैं. इस टेस्ट को करने से पहले कई युवतियां और लड़कियां स्कूल में प्रैगनेंट हो जाती थीं. लेकिन जब उन्होंने देखा कि स्कूल में इस तरह का टेस्ट शुरू हो गया है तो उन्होंने होलीडे के दौरान अपने पार्टनर से संबंध बनाने बंद कर दिए. हालांकि वह ये भी मानती है कि लड़कियों का स्कूल छूट जाना अच्छी बात नहीं है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार कई मानवाधिकार कार्यकर्ता इस बारे में आंदोलन चला चुके हैं, लेकिन कोई भी सरकार के खिलाफ जाकर इसे बंद नहीं कर सकता.

तंजानियां में शिक्षा की कमी के कारण लड़कियां शादी से पहले और कम उम्र में ही मां बन जाती हैं. ऐसे में जब उनका स्कूल भी छूट जाता है, तो उनका जीवन और कठिन होे जाता है. सरकार उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है.