इलाहाबाद, दारागंज में फुलवरिया रोड से नागवासुकि मंदिर तक एक हाथ में खप्पर और दूसरे में भुजाली लेकर नरमुंड की माला पहने जब मां काली निकलीं तो पूरे रास्ते में श्रद्धालु जायफल, नींबू व लौंग की बलि देकर उनके रौद्र को शांत कराते रहे। साथ ही जयकारे लगाते रहे। आधी रात के बाद अयोध्या पुरी (नागवासुकि मंदिर) पहुंचने पर काली के रौद्र रूप का प्रदर्शन समाप्त हुआ।

मां काली का पैंतरा देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटी। रात साढ़े दस बजे के बाद मुरारी पान शॉप चौराहे पर काली प्राकट्य की लीला जैसे ही शुरू हुई तो मां काली के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। देवी काली को रौद्ररूप में नृत्य करते देखकर बच्चे सहम गए और बड़े-बुजुर्ग भी पीछे हट गए। उनके रौद्ररूप को शांत कराने के लिए जगह-जगह जायफल, नींबू व लौंग की बलि दी जाने लगी। बलि मिलते ही रौद्र रूप शांत होता लेकिन कुछ ही देर में काली फिर रौद्र रूप में आगे बढ़ने लगतीं। एक हाथ में खप्पर और दूसरे हाथ में भुजाली के साथ मां काली का प्रदर्शन देख जहां एक ओर लोग स्तब्ध रह गए वहीं नृत्य कर रही मां काली के आगे पीछे जयकारे लगाते लोग चलने लगे।

बढ़ता रहा भक्तों का कारवां

मां काली फुलवरिया रोड पर जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे भक्तों का कारवां बढ़ता जा रहा था। घरों की छतों पर काली के रौद्र रूप का प्रदर्शन देख रही महिलाएं, लड़कियां भी उनका जयकारा लगा रही थीं। चारों तरफ भीड़ को देख जब काली पैंतरा भांजने लगतीं तो आसपास का पूरा इलाका कालीमय हो जाता। जैसे ही काली की सवारी आगे बढ़ती, लोग पीछे चल रहे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रथ पर उनके पूजन में जुट जाते। और श्रीराम के जयघोष के साथ काफिला आगे बढ़ जाता। शंकर कालोनी, राधानगर कालोनी होते हुए मां काली जब इंदिरा नगर कालोनी के सामने सड़क पर पहुंची तो काली मंदिर के सामने उनका भव्य स्वागत हुआ। नारियल और फल चढ़ाए गए तथा पूजन-अर्चन के साथ बलि दी गई। इसके बाद मां काली बक्सी खुर्द होते हुए बक्सी त्रिमुहानी पहुंची। वहां फिर मां का जोरदार स्वागत हुआ और जैसे ही वह नागवासुकि रोड पर पहुंचीं तो पूरा मोहल्ला मां काली के प्रदर्शन देखने के लिए उमड़ पड़ा। बीच-बीच में भक्त पूरे रास्ते मां काली के जयकारे लगा रहे थे। नागवासुकि मंदिर के पास काली लीला का समापन हुआ। मां काली के साथ श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र यादव उर्फ कुल्लू, महामंत्री जितेन्द्र कुमार गौड़, काली संयोजक रंजन सिंह, नागेन्द्र सिंह, विजय सोनकर, विशेष सहयोगी राजू राय, संतोष कुमार भारद्वाज, बबलू पंडा, संतोष पाल, विकास मिश्र, रामजी निषाद, सीपी सिंह, अंशुमान त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

प्रशासन झुका, दी अनुमति

दारागंज के स्वागं की प्राचीन परंपरा 38 साल बाद फिर शुरू हो गई। हालांकि शाम तक इसे लेकर पूरे क्षेत्र में संशय था कि प्रशासन पांच दिन की अनुमति देगा कि नहीं। बुधवार को एसीएम प्रथम के आदेश की जानकारी पाकर क्षेत्रीय लोग मायूस हो गए थे। क्योंकि उन्होंने सिर्फ तीन दिन की मोहलत दी थी। इसके बाद कमेटी के महामंत्री समेत अन्य पदाधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाने लगे और अंत में प्रशासन को क्षेत्रीय लोगों की भावनाओं के आगे झुकना पड़ा और पांच दिन की अनुमति प्रदान कर दी।

ज्योतिषाचार्य हैं काली पात्र

मां काली की भूमिका निभा रहे बक्सीकला निवासी रामजी पांडेय ज्योतिषाचार्य हैं। उनके पिता घनश्याम पांडेय, चाचा भोलाशंकर पांडेय, भाई श्यामजी पांडेय, संदीप पांडेय उनके काली पात्र बनने जहां प्रफुल्लित थे, वहीं मां व पत्नी की आंखें उन्हें काली पात्र बने देख खुशी के मारे छलक पड़ीं। मां व पिता का आर्शीवाद लेकर घर से निकले रामजी पांडेय को पूरे मोहल्ले के लोगों ने बधाई दी और प्रसाद वितरण किया।