ग्वालियर। एडिज एजिप्टाई मच्छर तीन बीमारियों का वाहक है। ये मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया के अलावा जीका वायरस भी फैलाता है। इस बीमारी के लक्षण भी डेंगू के समान ही हैं, जिसका विशेष कोई उपचार नहीं है। राजस्थान में 22 केस मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मध्यप्रदेश में भी जीका वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है। खास बात ये है कि इसकी जांच भी केवल भोपाल, दिल्ली एवं पुणे में ही संभव है। ऐसे में शहरवासियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरुरत है।

ये वायरस नवजात बच्चों को जल्दी शिकार बनाता है। जीका वायरस नवजात बच्चों में माईक्रोकिफेली और तंत्रिका संबंधित रोग से पीड़ित कर सकता है। ये एक वायरल रोग है, जिसका वाहक एडिज एजिप्टाई मादा मच्छर ही होता है। इसमें मरीज के शरीर पर चकते होना, बुखार, जोड़ो में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, बैचेनी और आंखे लाल हो जाती है। वर्तमान में इस बीमारी की जांच केवल एम्स भोपाल, एनसीडीसी नई दिल्ली एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे में ही संभव है। राजस्थान में केस मिलने के बाद संचालनालय स्वास्थ्य विभाग संयुक्त संचालक डॉ. अजय बरोनिया ने सभी जिलों को अलर्ट जारी कर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

ये दिए निर्देश

- जिले में अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार नवजात बच्चों में माईक्रोकिफेली और तंत्रिका संबंधित रोग एवं बुखार के लिए सर्वे कराया जाए।

- जिले में जिला टॉस्क फोर्स की बैठक तत्काल आयोजित की जाए।

- बैठक में सिविल सर्जन, पीडियाट्रिशियन, गायकोनोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट सहित अन्य चिकित्सकों को बुलाकर बीमारी के बारे में जानकारी देकर अलर्ट रहने के निर्देश दिए जाएं।

- जीका वायरस के लिए कोई विशेष उपचार नहीं है। सिटोमेटिक एवं सपोर्टिंव उपचार किया जाता है। इससे बचाव का कोई वैक्सीन भी नहीं है।

- जिले में उक्त रोग की रोकथाम, उपचार के लिए दवाएं पर्याप्त मात्रा में रखी जाएं।

- संदिग्ध मरीज मिलने पर तत्काल सूचना राज्य सर्विलांस इकाई को दी जाए।

जीका वायरस से बचाव के उपाय

- जिन स्थानों पर यह बीमारी फैली हो वहां जाने से बचें, विशेष रुप से गर्भवती महिला।

- एडिज मच्छर दिन के समय काटता है। इसलिए दिन में पूरे बांह के कपड़े पहनकर रहें।

 

- मच्छरदानी सहित अन्य क्रीम एवं मॉस्किटो कोइल या उपकरणों का प्रयोग करें।

- फेफड़े, हृदय, लीवर, गुर्दा, कैंसर से पीड़ित रोगी यात्रा पर जाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।