उदयपुर.  देश में उदयपुर के थाने इकलौते होंगे, जहां मंदिर हैं। इनमें से कुछ में दिन-रात अखंड ज्योत जलती है। पुलिसकर्मियों का विश्वास है कि अखंड ज्योत जब तक जलती रहेगी, तब तक थाना और थाना क्षेत्र में शांति व्यवस्था रहेगी। यहां हर रोज पुलिसकर्मियों के साथ आम लोग भी पूजा करते हैं। किसी थाने में स्वेच्छा से पंडित पूजा करने आ जाते हैं। यहां बड़े धार्मिक कार्यक्रम भी होते हैं। घंटाघर थाने का मंदिर 250 साल पुराना है।

 

भूपालपुरा थाना: यहां के मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। इसकी स्थापना 2004 में हुई। पुलिस का कहना है कि रघुनाथपुरा में दो लोगों के जमीन विवाद में यह मूर्ति जब्त कर लाई गई थी। फिर विधि विधान से स्थापना की गई। यहां महीने में एक बार सुंदरकांड का पाठ होता है और अखंड ज्योत जलती है।

 

प्रतापनगर थाना: इस थाने में भी एक मंदिर है। पुलिसकर्मियों के मुताबिक, यहां थाना खुलने से पहले एक चबूतरा होता था, जहां संत बैठकर पूजा पाठ करते थे। थाना बनने के बाद चबूतरे पर ही मंदिर का निर्माण हुआ। अंबाजी की मूर्ति स्थापित की गई। 2003 में मंदिर को जीर्णोद्धार किया गया। अब यहां पर पुलिसकर्मी पूजा करता है।

 

घंटाघर थाना:  घंटाघर थाने में मंदिर में अन्नपूर्णा माताजी की मूर्ति स्थापित है। यह मंंदिर अपराधियों के बैरक के बिलकुल पास है। यहां पर भी अखंड ज्योत जलती रहती है। इतिहासकार कृष्ण जुगनू बताते हैं कि यह मूर्ति और मंदिर 250 साल पुराना है। इसकी स्थापना महाराणा भीम सिंह ने की थी।

 

अंबामाता थाना: अंबामाता थाने में 1993 में शिवलिंग की स्थापना हुई थी। यह मूर्ति थाने के मालखाने में रखी हुई थी जो जब्त कर लाई गई थी। सेवानिवृत्त कांस्टेबल मूल सिंह ने तत्कालीन थानेदार प्रकाश पंचाेली से स्थापना की बात कही। इसके बाद हॉस्पिटल में काम कर रहे मजदूरों से थाने के पीछे चबूतरा बनवाकर स्थापना कराई गई। थाने में कार्यरत पुलिसकर्मियों के परिवार के सदस्य पूजा करते हैं।

 

सूरजपोल थाना: सूरजपोल थाने में भेरू जी मंदिर की स्थापना करीब 70 साल पहले हुई थी। पुलिसकर्मियों के अनुसार दावा है कि यहां अखंड ज्योत पिछले 60 साल से जल रही है। 1996 तक यहां जिले के बाहर से भी लोग आते थे और जागरण कार्यक्रम होता था। अभी थाने के पुलिसकर्मी यहां पर पूजा-पाठ करते हैं।