नई दिल्‍ली/दुशान्बे : शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के दो दिनी सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने ताजिकिस्‍तान की राजधानी दुशान्‍बे गईं विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने शुक्रवार को पाकिस्‍तान को भरे मंच पर अपने ही अंदाज में करारा जवाब दिया है. शुक्रवार को सम्‍मेलन में एससीओ के सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद फोटो सेशन हुआ. इसमें रूस के प्रधानमंत्री दमित्री मेदवेदेव समेत चीन, ताजिकिस्‍तान, उज्‍बेकिस्‍तान किर्गिस्‍तान कजाखस्‍तान के भी प्रमुख शामिल थे.

विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज दूसरी कतार में खड़ी थीं. उन्‍हीं की कतार में दायीं ओर पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी खड़े थे. फोटो सेशन जैसे ही खत्‍म हुआ तो सभी लोग जाने लगे. इस दौरान पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सुषमा स्‍वराज के पीछे ही थे और उन्‍हें देखकर मुस्‍कुराने लगे. लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने इस दौरान उन्‍हें देखा तक नहीं और सीधे बाहर की ओर चली गईं.
विशेषज्ञों के मुताबिक सुषमा स्‍वराज ने ऐसा करके पाकिस्‍तान को करारा जवाब दिया है. इससे पाकिस्‍तान को ये संदेश गया है कि उसकी नापाक हरकतें रहने से भारत उससे कोई बातचीज नहीं करना चाहता है.

बता दें कि कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे गई हैं. इस सम्मेलन में अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के अलावा आतंकवाद से मुकाबला करने में परस्पर सहयोग बढ़ाने से संबंधित चर्चा के केन्द्र में रहने की संभावना है. वह इस दौरान एससीओ से संबंधित बैठकों में हिस्सा ले रही हैं. द्विपक्षीय वार्ताएं कर रही हैं. इसके साथ ही वह ताजिकिस्तान में भारतीय समुदाय से रूबरू होंगी.

जून, 2017 में भारत के एससीओ का पूर्णकालिक सदस्य बनने के बाद शासनाध्यक्ष परिषद की यह दूसरी बैठक है. चीन के वर्चस्व वाले इस संगठन का भारत पिछले साल पूर्ण सदस्य बना था. उसमें उसके प्रवेश से क्षेत्रीय भू-राजनीति, व्यापार वार्ता में इस संगठन का दबदबा बढ़ने की संभावना है तथा उसे अखिल एशियाई स्वरूप भी मिलेगा. पिछले साल भारत के साथ पाकिस्तान को भी एससीओ की सदस्यता दी गई थी. एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में की गई थी.