नवरात्र की नवमी तिथि यानी आश्विन शुक्ल नवमी तिथि के दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माता सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली माता हैं इनमें माता के सभी रूप सामहित होते हैं जो नवरात्र के नौ दिनों की पूजा का फल अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। इसलिए नवमी तिथि को पूजा की पूर्णाहुति यानी पूजा का अंतिम निवेदन और भेंट हवन के रूप में किया जाता है।

दुर्गा पूजा नवमी हवन सामग्री

नवमी के दिन की पूजा में माता की पंचोपचार विधि से पाद्य, आर्घ्य, आचमन, स्नान, फूल, अक्षत, चंदन, सिंदूर,फल, मिठाई से पूजा की जाती है। माता के साथ उनके गणों, योगिनियों, गणेश, इद्र दसदिक्पाल नवग्रहों, ग्राम देवता, नगर देवता, कुलदेवी और देवता सहित लक्ष्मी, सरस्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। मात की पूजा आरती के बाद हवन के साथ पान, सुपारी, नारियल और कुछ पैसे लेकर पूर्णाहुति दी जाती है।

हवन की ऐसे करें तैयारी

हवन में धूमन की लकड़ी, अक्षत, तिल, घी, बेलपत्र, गुग्गुल, सुगंधित पदार्थ, किसमिस, छुहारा, नारियल, जौ, मखाना, मूंगफली, शहद सबकुछ मिलाकर हवन सामग्री बना लें। इसके बाद हवन कुंड बना लें। अगर हवन कुंड नहीं बना रहे हैं तो हवन की पेटी बाजार से खरीद सकते हैं।

दुर्गा पूजा हवन की विधि

हवन करते समय सबसे पहले गंगाजल से सभी सामग्रियों को पवित्र कर लें। इसके बाद हवनकुंड में आम की सूखी लकड़ियां रखें फिर रूई में घी लगाकर लकड़ी के ऊपर रख दीजिए फिर कपूर जलाकर हवनकुंड की ज्वाला प्रज्जवलित कीजिए। इसके बाद बाद घी से ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः’ मंत्र से माता के नाम से आहुति दें फिर सभी देवी-देवताओं से नाम से 3 या 5 बार आहुति दें।

इस तरह करें नवरात्र की नवमी तिथि को हवन

इसके बाद हवन सामग्री से हवन करें। माता का हवन ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः’ इस बीज मंत्र से 108 बार करें। अंत में खीर और शहद मिलाकर हवन करना चाहिए। हवन के बाद आरती करें और हवन का भभूत सभी लोग लगाएं। इसके बाद कम से कम एक कन्या को भोजन कराकर उनसे आशीर्वाद लें।

दुर्गा पूजन हवन विधि विस्तार से

नोटः दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र हैं अगर आप विस्तार से हवन करना चाहते हैं तो कवच, कीलक अर्गला और सप्तशती के 13 अध्याय के सभी मंत्रों के साथ स्वाह बोलते हुए हवन करें। यही उत्तम विधि है।