शरद पूर्णिमा सर्वार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी। यह योग 4 साल बाद बन रहा है। इस बार शरद पूर्णिमा 24 अक्टूबर बुधवार के दिन रहेगी। इस पर्व को मनाने के लिए शहर में तैयारियां शुरू हो गईं हैं।मां चामुंडा दरबार के पुजारी पंडित रामजीवन दुबे ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष स्नान दान व्रत, पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य विनोद रावत ने बताया कि इस दिन चंद्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होने को लेकर एक किवदंती प्रसिद्ध है। इसी कारण इस दिन खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखकर अगले दिन प्रातः काल में खाने का विधि-विधान है। इस पूर्णिमा को आरोग्य के लिए फलदायक माना जाता है।
मान्यता अनुसार चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा भोजन में समाहित हो जाती हैं, जिसका सेवन करने से दमे की बीमारी दूर हो जाती है। ग्रंथों में भी इसकी चांदनी के औषधीय महत्व का वर्णन मिलता है। खीर को चांदनी में रखकर इसका सेवन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है। व्रतधारी महिलाओं द्वारा मावे एवं शकर मिलाकर तीन लड्डू बनाकर तुलसी पात्र के साथ भगवान कृष्ण को भोग लगाकर पूजा-पाठ की जाती है।