दीपावली का पावन पर्व 7 नवंबर, बुधवार को धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन गणेश, लक्ष्मी का विधिविधान से पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।

इस बार अमावस्या तिथि पर महानिशीथ काल का अभाव है। इसलिए निशा पूजा व तांत्रिका पूजा स्थिर लग्न सिंह में की जाएगी जो शुभकारक रहेगा। पं. दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली के अनुसार अमावस्या तिथि मंगलवार रात 10:06 बजे से शुरू हो जाएगी जो बुधवार की रात 9:01 बजे तक रहेगी। इसलिए उदया तिथि में अमावस्या का मान सूर्योदय में मिल रहा है। साथ ही प्रदोष काल भी उत्तम योग है। यह प्रदोष काल दिन-रात का संयोग काल माना जाता है। यानी दिन विष्णु स्वरूप रात लक्ष्मी के रूप में होती हैं। दीपावली के पूजन में प्रदोष काल का महत्व ज्यादा माना जाता है। बुधवार को सूर्योदय से स्वाति नक्षत्र व्याप्त रहेगा।

पूजन मुहूर्त

प्रदोष काल : शाम 5:42 से 7:37 बजे तक (पूजन व खाता पूजन के लिए शुभ मुहूर्त)

स्थिर लग्न कुंभ में : दोपहर 1:06 से दोपहर 2:34 तक

प्रदोष काल व्यापिनी स्थिर लग्न वृष : शाम 5:42 से 7:38 बजे तक।

महानिशीथ काल : रात 12:10 से रात 2:30 बजे तक।

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