नई दिल्ली: भारतीय मीडिया में शुक्रवार से इस तरह की खबरें छाई हुई हैं कि भारत के स्वदेशी पेमेंट नेटवर्क रुपे (RuPay) की बढ़ती लोकप्रियता और इस्तेमाल की वजह से अमेरिकी कंपनी मास्टरकार्ड ने ट्रंप सरकार से कहा है कि मोदी सरकार अपने पेमेंट नेवटर्क को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रही है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया. न्यूज एजेंसी ने यह भी दावा किया कि उसने मास्टरकार्ड का शिकायती दस्तावेज देखा है. 

हालांकि अगर पूरी रिपोर्ट को पढ़ा जाए तो मास्टरकार्ड का ऑन रिकॉर्ड जवाब भी सामने नजर आता है. न्यूज एजेंसी ने खूद अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है. मास्टरकार्ड ने अपना पक्ष रखते हुए उसी रिपोर्ट में कहा है कि वह भारत सरकार के कदम का पूर्ण समर्थन करती है और देश में काफी ज्यादा निवेश कर रही है. लेकिन कंपनी ने यूएसटीआर को लिखे गए अपने नोट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की.

पहले नजर मास्टरकार्ड के शिकायती पत्र पर डाल लेते हैं. मास्टरकार्ड ने अमेरिकी सरकार से यह प्रस्ताव रखने को कहा कि भारत सरकार रुपे से होने वाली आमदनी को लेकर भ्रम फैलाने के साथ-साथ इसे विशेष प्रयास के तहत बढ़ावा दे रही है, जिसे रोका जाना चाहिए. रॉयटर्स के मुताबिक, भारतीय पेमेंट नेटवर्क रुपे का असर यह हुआ है कि अमेरिका की दिग्गज पेमेंट कंपनियां जैसे मास्टरकार्ड और वीजा का दबदबा कम हुआ है. भारत के 1 बिलियन डेबिट और क्रेडिट कार्ड में से आधे से अधिक अब रुपे पेमेंट सिस्टम के तहत काम कर रहे हैं. इससे मास्टर कार्ड को काफी परेशानी हो रही है.  
यूएसटीआर में की मोदी सरकार की शिकायत
रिपोर्ट में दावा किया गया कि मास्टरकार्ड ने 21 जून को संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) को लिखा, "प्रधानमंत्री राष्ट्रवाद के साथ रुपे कार्ड के इस्तेमाल को जोड़ रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि इस कार्ड का उपयोग एक प्रकार से राष्ट्र सेवा जैसा है." मास्टरकार्ड में ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी के वाइस-प्रसिडेंट साहरा इंग्लिश ने अपने नोट में लिखा है, "पीएम मोदी द्वारा डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने का किया गया प्रयास सराहनीय था, लेकिन भारत सरकार ने वैश्विक कंपनियों के नुकसान के लिए संरक्षणवादी उपायों की एक सीरीज बनाई. अमेरिकी कंपनियां मोदी सरकार की संरक्षणवादी नीतियों की वजह से जूझ रही हैं."  

मास्टरकार्ड का जवाब भी जान लीजिए
उधर, मास्टरकार्ड ने अपना पक्ष रखते हुए उसी रिपोर्ट में कहा है कि वह भारत सरकार के कदम का पूर्ण समर्थन करती है और देश में काफी ज्यादा निवेश कर रही है. लेकिन कंपनी ने यूएसटीआर को लिखे गए अपने नोट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की. कंपनी में वाइस-प्रेसिडेंट साहरा इंग्लिश ने भी रॉयटर्स के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यूएसटीआर ने भी इस मामले में किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी. इसके साथ ही यह भी साफ नहीं हो पाया है कि अमेरिकी एजेंसी ने मास्टरकार्ड की चिंता को लेकर भारत सरकार से कोई बात की है या नहीं. इस बारे में वीजा ने भी रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया है. यही नहीं पीएमओ से भी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.