खंडवा. चुनावी माहौल में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां गरीबों और मजदूरों के हित में काम करने की बात कहकर उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। पिछले 15 सालों से मप्र की सत्ता पर काबिज भाजपा यह दावा कर रही है कि शिवराज सरकार ने मप्र में गरीबों व मजदूरों के लिए सबसे अधिक काम किया है।

लेकिन हकीकत इसके उलट है। खंडवा जिले के 23 हजार गरीब मजदूर रोजगार के लिए महाराष्ट्र व गुजरात में पलायन कर गए हैं। इसका कारण यह है कि मप्र में उन्हें एक दिन की मजदूरी के रूप में मात्र 174 रुपए मिलते हैं वहीं महाराष्ट्र व गुजरात में 400 रुपए। प्रदेश में शत-प्रतिशत मतदान कराने के लिए अधिकारियों के एक दल को इन मजदूरों को वापस लाने के लिए भेजा गया है।


चुनाव से पहले खंडवा जिले के करीब 23 हजार मजदूर महाराष्ट्र व गुजरात में पलायन कर गए। जिला प्रशासन अब पलायन कर गए मजदूरों को मतदान के लिए वापस लाने की तैयारी में है। कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस कार्य के लिए अपने एक अफसर काे महाराष्ट्र भेजा। अफसर ने वहां के कलेक्टर, एसपी और श्रम अधिकारी से श्रमिकों को निर्वाचन वाले दिन खंडवा भेजने का निवेदन किया। यही नहीं जिले के जो बच्चे इंदौर के अलावा अन्य शहरों में शिक्षा ले रहे हैं वहां की संस्थाओं को भी पत्र लिखा है।


चुनाव को महज दो दिन शेष बचे हैं। चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी भी सड़क पर उतरकर जनसंपर्क में पसीना बहा रहे हैं। लेकिन एक वर्ग ऐसा है जो कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र का गणित गड़बड़ा सकता है, वह है मजदूर। जिले की हरसूद विधानसभा में खालवा ऐसा क्षेत्र है, जहां से करीब 10 हजार मजदूर हर साल पलायन कर मजदूरी करने महाराष्ट्र और गुजरात जाते हैं।

इसके अलावा पंधाना, खंडवा, मांधाता विधानसभा से करीब 13 हजार मजदूर हैं जो मजदूरी के लिए अन्य प्रांतों में जाते हैं। गुजरात व महाराष्ट्र में गन्ना, कपास आदि की कटाई के लिए नवंबर में ही यह मजदूर वहां पहुंच गए हैं। अब प्रत्याशी और प्रशासन दोनों बड़ी संख्या में पहुंचे मजदूरों को वापस लाने की कवायद में लग गए हैं।


अमरावती पहुंचे अफसर, संस्थाओं को लिखे पत्र
अमरावती जिले में खालवा सहित आसपास के आदिवासी क्षेत्रों से करीब 5 हजार मजदूर काम के लिए गए हैं। जानकारी मिलने पर प्रशासन द्वारा जनपद पंचायत सीईओ को वहां भेजा गया। अफसर ने वहां के एसपी, कलेक्टर व श्रम अधिकारियों से चर्चा की व मतदान के लिए जिले में वापस भेजने का निवेदन किया। इसके अलावा इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कालेज सहित अन्य शिक्षण संस्थाओं में ही जिले के करीब 4 हजार विद्यार्थी शिक्षण ले रहे हैं। प्रशासन द्वारा पत्र के माध्यम से वहां के प्रशासनिक अफसरों से चर्चा की जा रही है।


पलायन की मुख्य वजह है मजदूरी दर
जिले में मनरेगा के तहत तालाब निर्माण, बंधान निर्माण, वृक्षारोपण, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य कार्य चल रहे हैं। जिसकी मजदूरी की सरकारी दर 174 रुपए प्रतिदिन है। जबकि महाराष्ट्र में प्रति व्यक्ति मजदूरी 400 रुपए तक है। अधिक मजदूरी मिलने से जिले का मजदूर अन्य राज्यों में जाता है। चुनाव से पहले एक साथ इतने मजदूरों के पलायन का कारण मजदूरी की कम दर है।

 

जिले की हरसूद सहित अन्य विधानसभाओं से बड़ी संख्या में मजदूर गुजरात, महाराष्ट्र मजदूरी के लिए जाते हैं। चुनाव के पहले भी मजदूर वहां पहुंचे हैं। वे जिले में ही मतदान करें ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।

 

 

डीके नागेंद्र, उप जिला निर्वाचन अधिकारी