इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने करतारपुर गलियारा को ‘‘हमारे सिख भाइयों’’ की पुरानी इच्छा की पूर्ति के लिए की गई पहल बताते हुए इस ऐतिहासिक कदम के खिलाफ ‘‘नकारात्मक प्रचार अभियान’’ की शनिवार को आलोचना की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को करतारपुर गलियारे की आधारशिला रखी जिससे सीमा के दोनों ओर स्थित दो प्रमुख गुरूद्वारे जुड़ेंगे. इस कार्यक्रम में भारत से दो केंद्रीय मंत्रियों हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी के साथ ही कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल हुए थे. 

खान ने इस समारोह का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर सहित द्विपक्षीय वार्ता बहाल करने के कदम का आह्वान करने के लिए किया. उनकी इस टिप्पणी पर भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया जतायी गई. भारत ने इस बात पर खेद जताया कि खान ने इस पवित्र मौके का इस्तेमाल कश्मीर के बारे में उल्लेख करने के लिए किया जो भारत का एक अभिन्न हिस्सा है.

गुरूवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया कि खान ने करतारपुर गलियारे के लिए आधारशिला कार्यक्रम में भारत सरकार की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए ‘गुगली’ फेंकी. इस पर कौर और अन्य भाजपा नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया जतायी गई. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘हम ‘करतारपुर गलियारे’ पहल को लेकर भारतीय मीडिया के एक वर्ग द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ निरंतर नकारात्मक प्रचार अभियान को लेकर बहुत निराश है.’’ 
बहुप्रतीक्षित करतारपुर गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को भारत के गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक गुरूद्वारे से जोड़ेगा और इससे भारतीय सिख श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त आवागमन की सुविधा मिलेगी. करतारपुर गलियारे का निर्माण छह महीने में पूरा होने की उम्मीद है. पाकिस्तान ने विशेष तौर पर जोर दिया कि गलियारा खोलने की पहल सिर्फ ‘‘हमारे सिख भाइयों’’ की पुरानी इच्छा के सम्मान में और विशेष तौर पर बाबा गुरू नानक देव की 550वीं जयंती के मद्देनजर की गई.