नई दिल्ली,   हनी ट्रैपिंग आतंकी संगठनों के लिए पैर पसारने का मुफीद जरिया बन गया है. हनी ट्रैपिंग के जरिए आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर के युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं और उन्हें अपने स्लीपिंग सेल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके लिए वह घाटी की कुछ महिलाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं.

हाल ही में गिरफ्तार सैयद शाजिया (30 साल) की महिला से पूछताछ में ऐसे खुलासे हुए हैं. जानकारी मिली है कि यह महिला 'हनी ट्रैपिंग' के जरिए युवाओं से हथियार तस्करी कराती थी. बांदीपोरा से गिरफ्तार की गई इस महिला के फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स के अकाउंट भी मिले हैं, जिन पर घाटी के कई युवा उसे फॉलो करते हैं.

 

थी पुलिस की मुखबिर, खबर देती थी आतंकियों को

एजेंसी की मानें तो शाजिया पर उसकी नजर काफी दिनों से थी. वह सोशल मीडिया पर कश्मीरी युवाओं से बात करती थी. उनसे मिलने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक 'कंसाइनमेंट' ले जाने की शर्त रखती थी. शाजिया कई पुलिस वालों के संपर्क में थी और मुखबिरी का काम करती थी. लेकिन पुलिस वालों को सूचना देने की बजाए वह सेना से जुड़ी गतिविधियां बॉर्डर पार बैठे आतंकियों तक पहुंचाती थी.

जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करती थी शाजिया

शाजिया जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शेरवान उर्फ अली के संपर्क में आई. शेरवान ने उसका परिचय पाकिस्तानी आतंकी सुफियान और कासिम खान गौरी से कराया था. तभी से वह जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करने लगी और उनके लिए हथियारों की तस्करी के साथ हनी ट्रैपिंग के जरिए युवाओं को अपने प्यादों के रूप में इस्तेमाल करने लगी थी.

एनकाउंटर के बाद मिली थी संदिग्ध महिला की जानकारी

शाजिया की गिरफ्तारी से एक हफ्ते पहले पुलिस ने आसिया नाम की महिला को लावेपोरा के बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया था. उसके पास से पुलिस को 20 ग्रेनेड मिले थे, जिसे वह शहर में ले जा रही थी. पुलिस उस (आसिया) पर लश्कर-ए-तैयाब के आतंकी अबु इस्माइल और छोटी कसीम के एनकाउंटर के बाद नजर रख रही थी. इन दोनों आतंकी ने पिछले साल अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया था, जिसमें 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी. एनकाउंटर के दौरान पुलिस को कई दस्तावेज मिले थे. इन दस्तावेज में उत्तरी कश्मीर में एक महिला के जरिए हथियारों की तस्करी का जिक्र था.