नई दिल्ली, राजस्थान विधानसभा (Rajasthan assembly election 2018) के लिए होने वाले मतदान में अब चंद दिन बचे हैं और ऐसे में भाजपा और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पूरे राज्य में किसान और बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। लेकिन चुनाव में इस बार किसान ही तय करेंगे की राजस्थान में कौन राज करेगा। 

भाजपा और कांग्रेस दोनों इस बार के विधानसभा चुनाव में किसानों पर नजर टिकाए हुए हैं। क्योंकि राजस्थान में किसान मतदाता काफी प्रभावी हैं और शहरी इलाकों में सिर्फ एक चौथाई लोग ही रहते हैं। राजस्थान में आधे से अधिक लोगों के पास खुद की कृषि भूमि है। इन लोगों के लिए कृषि पारिवारिक आय का एक महत्वपूर्ण घटक है। कृषि पर बढ़ती लागत और मुनाफा घटना किसानों के लिए संकट का सबब बन चुका है। 

हालांकि किसान संकट को कम करने के लिए भाजपा सरकार ने बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1950 रुपये प्रति कुंतल कर दिया है। लेकिन किसान अभी खरीद कमजोर होने और भुगतान में देरी के चलते खुले बाजार में बाजरे को कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। इसके चलते किसानों में काफी गुस्सा है। भाजपा सरकार के लिए किसानों के गुस्से को काबू करना बड़ी चुनौती होगी। जबकि कांग्रेस के पास सत्ता में आने के लिए इसे भुनाने का मौका होगा। 
 

राजस्थान चुनाव में इस बार राजपूत फैक्टर भी काफी प्रभावी भूमिका निभाएगा। क्योंकि राज्य की हर विधानसभा सीट पर राजपूत अच्छी तादाद में हैं। एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग और गैंगस्टर आनंदपाल एनकाउंटर के कारण ये नाराज हैं। 

बेरोजगारी

इस बार बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। युवाओं का कहना है कि नई नौकरियां तो दूर सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भी भरने की कोशिश नहीं हो रही है। 

रोजगार भत्ता का वादा

भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में रोजगार के 50 लाख अवसर उपलब्ध कराने और 21 वर्ष से अधिक उम्र के बेरोजगारों को पांच हजार बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया है। 

एमएसपी  

राज्य के किसान दो तरह की दिक्कत बताते हैं, एक तो जिन फसलों का समर्थन मूल्य घोषित है, वह उन्हें नहीं मिल पा रहा। 

पेंशन का भरोसा

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को साधने के लिए पेंशन देने का भी भरोसा दिलाया है। खास बात ये है कि यह पेंशन बुजुर्गों को घर बैठे ही मिल जाया करेगा।