नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता टी टी वी दिनाकरण को दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न हासिल करने के वास्ते चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रिश्वत देने के मामले में मंगलवार को आपराधिक षड़यंत्र के आरोप तय किए. दिनाकरण विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्धाज की अदालत में पेश हुए और खुद को बेकसूर बताया. अदालत ने उनके खिलाफ मामला चलाने को मंजूरी दी.

इस धाराओं के तहत तय किए गए आरोप
अदालत ने दिनाकरण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश रचने), 201 (साक्ष्यों को नष्ट करने) तथा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आरोप तय किए. अदालत ने गवाहों के बयान दर्ज कराने के साथ मामले की सुनवाई 17 दिसंबर से शुरू करने के आदेश दिए. इससे पहले अदालत ने 17 नवम्बर को उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए थे.

क्या है पूरा मामला
अन्नाद्रमुक से निष्कासन के बाद दिनाकरण ने अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम नाम से पार्टी का गठन किया था. उन्हें अप्रैल 2017 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत दे दी गई थी. कथित बिचौलिए सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश रचने, साक्ष्यों को नष्ट करने एवं भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत सुनवाई शुरू की गई थी.
दिनाकरण के सहयोगी टी पी मल्लिकार्जुन तथा बी कुमार नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ भी इन आरोपों पर सुनवाई शुरू की गई. दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 2017 में एक आरोप पत्र दाखिल किया था जिसमें कहा गया था कि चंद्रशेखर ने दिनाकरण तथा अन्य के साथ शशिकला की अगुवाई वाले अन्नाद्रमुक के धड़े के लिए दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न हासिल करने के लिहाज से चुनाव अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची थी.