कातोवित्स । पोलैंड में आधिकारिक रूप से शुरू हुए सीओपी 24 शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र ने चेताया कि विश्व विनाशकारी जलवायु परिवर्तन को रोकने की अपनी राह से दूर है। बेलगाम ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के मनुष्य के तरीकों पर चर्चा करने के लिए कई देश पोलैंड में एकत्रित हुए हैं। हाल ही में एक के बाद एक पर्यावरण संबंधी घातक रिपोर्टें सामने आ रही हैं जिनमें दिखाया गया कि भूमंडलीय तापमान में बेलगाम इजाफे को रोकने के लिए मानव को अगले दशक के भीतर अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में जबरदस्त कटौती करनी होगी। इन रिपोर्टों पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा, हम अब भी बहुत कुछ नहीं कर रहे हैं, न ही तेज गति से बढ़ रहे हैं।
खतरे की जद में आने वाले देश फिजी, नाइजीरिया और नेपाल के नेता अपने-अपने देश का पक्ष रखने वाले है। पेरिस जलवायु समझौते में जिन वादों पर सहमति बनी थी उन पर और चर्चा करना है। मेजबान पोलैंड खुद कोयले से प्राप्त होने वाली ऊर्जा पर बहुत ज्यादा निर्भर है। वह ‘‘जीवाश्म ईंधन छोड़ने के लिये उचित व्यवस्था के अपने एजेंडा पर जोर देगा और आलोचकों का कहना है कि यह उस दशकों तक प्रदूषण फैलाने की मंजूरी देने जैसा होगा। उल्लेखनीय है कि 2015 के पेरिस जलवायु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले करीब 200 राष्ट्रों को वैश्विक तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे, और संभव हो सके तो 1.5 डिग्री सेल्सियस की सुरक्षित सीमा तक रखने की सहमति बनी थी। पेरिस समझौते के तहत अमीर देशों के विकासशील देशों का वित्तपोषण करने की उम्मीद थी ताकि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं को हरित तौर-तरीकों पर आधारित बना सकें। लेकिन समझौते से अलग होने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले ने कमजोर राष्ट्रों के बीच भरोसे को तोड़ा जिन्हें डर है कि उनकी मदद के लिए पर्याप्त नकद नहीं है।