नई दिल्ली, अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण के बाद अब भारत सरकार बाकी बचे दो बिचौलियों को भी देश लाने के अभियान में लग गई है. इंडिया टुडे को भारत सरकार के सूत्रों से 'मिशन मिलान' के बारे में जानकारी मिली है.

इतलावी प्रॉसिक्यूटर्स के साथ मिलाया हाथ

सूत्रों के मुताबिक, अगस्ता वेस्टलैंड के पूर्व हेड बुर्नो स्पागनोलीनी और पूर्व फिनमेक्कानिका (अब लियोनार्डो) के सीईओ गुसेप ओर्सी के प्रत्यर्पण के लिए सरकार ने इतलावी प्रॉसिक्यूटर्स के साथ हाथ मिलाया है. इससे पहले जनवरी में इटली की कोर्ट ने दोनों बिचौलियों को पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर क्लीन चिट दे दी थी. इन दोनों पर भारत सरकार के साथ 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर्स की डील में कथित रूप से घूस देने का आरोप लगा था.

दोनों बिचौलियों को भारत लाने में मिलेगी मदद

सुप्रीम कोर्ट में अगस्ता वेस्टलैंड और फिनमेक्कानिका के इन दो कर्मचारियों पर आरोप साबित होने के बाद भारत सरकार ने इतलावी प्रॉसिक्यूटर्स से मदद ली है. भारत को उम्मीद है कि इटली की कोर्ट में अगर सफलता मिलती है तो यह मामला पूरी दुनिया की नजर में आ जाएगा और बाकी बचे दो बिचौलियों को भारत लाने में मदद मिल जाएगी.

इससे पहले, दिसंबर 2016 में इटली की सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों बिचौलियों के आरोपी साबित होने के बाद इस केस में फिर से ट्रायल की अनुमति दी थी. इतालवी प्रॉसिक्यूटर्स के अनुसार, इस डील में बुर्नो स्पागनोलीनी, गुसेप ओर्सी और क्रिश्चयन मिशेल ने बिचौलियों की भूमिका निभाई और घूस दी थी. इसमें से यूएई चले गए ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल को भारतीय एजेंसियां भारत ले आई हैं.

मिशेल को भारत लाने के लिए चलाया गया ऑपरेशन 'यूनिकॉर्न'

बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने मिशेल को पांच दिन की कस्टडी में भेजा गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीआई उससे पूछताछ के दौरान बाकी दो बिचौलियों के बारे में अहम जानकारी इकट्ठा करेगी. इससे पहले मिशेल के प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया को बेहद सीक्रेट तरीके से अंजाम दिया गया. मिशेल को भारत लाने के लिए जो ऑपरेशन चलाया गया उसे बेहद गोपनीय रखा गया था. इस ऑपरेशन का नाम 'यूनिकॉर्न' रखा गया था, जिसकी बागडोर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के हाथों में थी. इस ऑपरेशन को इंटरपोल और सीआईडी ने मिलकर चलाया. 'मिशन मिशेल' को सफल बनाने के लिए डोभाल सीबीआई के प्रभारी निदेशक नागेश्वर राव के संपर्क में थे.

क्या है मामला

बता दें, 2010 में भारतीय वायुसेना के लिए 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए एंग्लो-इतालवी कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड और भारत सरकार के बीच करार हुआ था. जनवरी 2014 में भारत सरकार ने 3600 करोड़ रुपये के करार को रद्द कर दिया. आरोप था कि इसमें 360 करोड़ रुपये का कमीशन लिया गया. इसके बाद भारतीय वायुसेना को दिए जाने वाले 12 एडब्ल्यू-101 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की सप्लाई के करार पर सरकार ने फरवरी 2013 में रोक लगा दी थी. जिस वक्त यह आदेश जारी किया गया, भारत 30 फीसदी भुगतान कर चुका था और बाकी तीन अन्य हेलीकॉप्टरों के लिए आगे के भुगतान की प्रक्रिया चल रही थी.

यह मामला इटली की अदालत में चला जिसमें ये बातें उजागर हुईं कि 53 करोड़ डॉलर का ठेका पाने के लिए कंपनी ने भारतीय अधिकारियों को 100-125 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी थी. इतालवी कोर्ट के फैसले में पूर्व आईएएफ चीफ एस पी त्यागी का भी नाम सामने आया था. अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले का खुलासा होने के बाद यूपीए सरकार को विपक्ष ने घेर लिया था. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज किया जाए. यह भी आरोप लगे थे कि मोदी सरकार ने इटली से सोनिया गांधी के खिलाफ सबूत मांगे थे.