कोलकाता: कोलकाता हाईकोर्ट ने बीजेपी की प्रस्तावित रथयात्रा पर रोक लगी दी है. इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी. कोर्ट ने कहा कि रथयात्रा की अनुमति देने से पहले जहां-जहां से यह गुजरेगी, उन जिलों के पुलिस अधीक्षकों से राय लिए बगैर अनुमति नहीं दी जा सकती है. आज बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष की गाड़ी में तोड़फोड़ भी की गई है.

कोर्ट ने कहा कि 21 दिसंबर से पहले सभी संबंधित जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक बीजेपी प्रतिनिधिमंडल से मिलकर बात करें, जिसके बाद रथयात्रा की अनुमति देने पर विचार करें. इस संबंध में कोर्ट ने याचिकाकर्ता (बीजेपी) को अगले सात दिनों के भीतर अनुपूरक हलफनामा (सप्लीमेंट्री एफिडेविट) जमा करने को कहा है.
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए बीजेपी रथयात्रा निकालने वाली है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह राज्य में तीन अलग-अलग रथयात्रा को रवाना करेंगे जो एक महीने तक यात्रा तक प्रदेश की सभी 42 लोकसभा सीटों को कवर करेगी. पहले चरण में अमित शाह 7 दिसंबर को बंगाल के कूचबिहार से रथयात्रा की शुरुआत करने वाले थे.

दूसरे चरण की रथयात्रा 9 दिसंबर को दक्षिण 24 परगना के सागर से शुरू होगी. इसी तरह तीसरे रथयात्रा की शुरुआत 14 दिसंबर को बीरभूम के तारापीठ से होगी. एक महीने के इस कार्यक्रम में बीजेपी के स्टार प्रचार शामिल होंगे और जनता तक अपनी बात पहुचाएंगे. तीनों रथयात्रा का समापन जनवरी महीने में कोलकाता में होगा. उम्मीद है कि पीएम मोदी इस मेगा रैली को संबोधित करेंगे.
सुनवाई के दौरान बीजेपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि हम रथयात्रा को लेकर अनुमति नहीं मांग रहे हैं, बल्कि मदद की मांग की है. रैली निकालना हमारा मूलभूत अधिकार है. राज्य सरकार का काम है इसमें सहयोग करना और लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करना. इसलिए, मैंने अपने प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी सरकार और पुलिस प्रशासन को पहले ही दे दी है.

सरकारी वकील ने कहा कि इस कार्यक्रम की वजह से माहौल बिगड़ने का डर है. इस पर बीजेपी के वकील ने कहा कि क्या राज्य सरकार के पास कानून व्यवस्था को मेंटेन करने के लिए पर्याप्त मशिनरी नहीं है? उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लग रहा है कि जब एक विशेष पार्टी का कोई कार्यक्रम होता तभी उनके पास पर्याप्त मशिनरी होता है.
तमाम दलीलों पर जज ने कहा कि अगर किसी तरह की अनहोनी होती है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? अगर एक जिले में कोई कार्यक्रम होता है और वहां कुछ होता है तो, क्या आपके जिला अध्यक्ष इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं? इस तरह दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी और जिला पुलिस अधीक्षक से अनुमति के बगैर रथयात्रा की इजाजत नहीं दी जा सकती है.