न्यूर्याक । किशोर उम्र वाले बच्चे को पालना पैरंट्स के लिए हमेशा से ही काफी मुश्किल रहा है, विशेषकर 13 से 18 साल के बीच के बच्चों को। इस उम्र में आते ही आपके प्यारे और स्वीट बच्चे के ऐटिट्यूड में अचानक बदलाव आने लगते हैं और यह बदलाव पैरंट्स के लिए कई बार शॉकिंग होता है। बच्चों के व्यवहार में गुस्सा और हिंसा साफ दिखने लगता है और सम्मान की भावना खत्म होने लगती है। इस समय आपको अहसास होने लगता है कि आपकी डांट भी बेअसर होती जा रही है। ऐसे में परेशान होने की बजाए बच्चे के व्यवहार में आए बदलाव से डील करना सीखें। हम आपको ऐसी कुछ स्ट्रैटेजी के बारे में बता रहे हैं जिससे आप अपने बागी तेवर दिखाने वाले किशोर बच्चे से आसानी से डील कर पाएंगे। बच्चे का खराब व्यवहार आपको गुस्सा दिला सकता है, आप हर्ट भी महसूस कर सकते हैं लेकिन अगर अपने बच्चे के खराब व्यवहार के जवाब में आप भी गुस्से से पेश आएंगे तो ये आग में घी का काम करेगा और केवल नुकसान ही हाथ लगेगा। 
लिहाजा घर का माहौल खराब करने की बजाए काफी सोच समझकर ही रिस्पॉन्ड करें। सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि बच्चों के ग्रोथ का ये एक अहम फेज है। आप भले ही इस फेज को नापसंद करें लेकिन आपको इस सच को अपनाना ही पड़ेगा कि आपका बच्चा अब छोटा बच्चा नहीं रह गया। इस उम्र में किशोरों में काफी फिजिकल और इमोशनल बदलाव आते हैं, स्कूल का भी प्रेशर ज्यादा होता है और अपने दोस्तों के साथ भी रिश्ते में बदलाव आता है। ऐसे में आपने बच्चे के उम्र के इस पड़ाव में उसकी मदद करें, उन्हें समझाएं और खुद भी समझें कि आपका बच्चा अपनी लाइफ में हो रहे बदलाव को समझ रहा है। बच्चे उदाहरणों से सीखते हैं इसलिए इस बात का जरूर ध्यान रखें कि आप अपने बच्चे से कैसे रिऐक्ट कर रहे हैं। अगर आप अपने बच्चे पर चिल्ला रहे हैं तो इस बात के लिए भी तैयार रहें कि वो भी आप पर चिल्ला सकता है। ऐसे में इस सिचुएशन में शांत दिमाग से डील करें और जब सब कुछ कंट्रोल में हो तो अपने बच्चे से उस बारे में बात करें न कि गुस्सा दिखाएं। लॉजिकल बहस करें। इसके अलावा अगर आप चाहते हैं कि बच्चा आपका सम्मान करे, आपको रिस्पेक्ट दे तो आप भी उससे सम्मान के साथ बात करें। जहां तक संभव हो बच्चे से हर विषय पर बात करें, उसे समझाएं, उसकी बातों को गंभीरता से सुनें और मजाक न उड़ाएं।
ज्यादातर पैरेंट्स जब बच्चों से डील करने की बात आती है तो उस स्थिति का सामना करने की बजाय उसे टालने लगते हैं। ऐसा करने से आपके बच्चे कभी भी आपको समझ नहीं पाएंगे। साथ ही वह आपको कुछ नहीं समझेंगे और आपसे अपनी कोई बात शेयर नहीं करेंगे। बच्चों के लिए कुछ नियम बनाएं और अगर वे इसे नहीं मानते हैं तो उन्हें सजा भी दें। हमेशा बच्चों को लेक्चर देना उन्हें परेशान करता है। ज्यादातर समय ऐसा होता है कि वे आपकी बातें एक कान से सुनते हैं और दूसरे से निकाल देते हैं। किशोर बच्चों को हमेशा लगता है कि वे आपसे ज्यादा स्मार्ट हैं। यहां तक उनकी ये सोच आपके लेक्चर भी नहीं बदल सकते। इसलिए उनकी गलतियां गिनाने से अच्छा है कि उनके लिए टास्क बनाएं और वे इसे आसानी से कंप्लीट न कर सके इसलिए इसमें काफी रुकावटें भी डालें।