जयपुर. राजस्थान में गुर्जर समेत पांच जातियों को पांच फीसदी आरक्षण दिए जाने संबंधी विधेयक बुधवार को विधानसभा में पेश किया गया। इसमें सरकारी नौकरियों के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं में अलग से आरक्षण देने का प्रावधान है। पिछले छह दिनों से राज्य का गुर्जर समाज आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहा है। बुधवार को भी हिंडौन, मलराना समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रेल और सड़क मार्ग बाधित किया।
विधानसभा में विधेयक कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला ने पेश किया। इससे पहले मंगलवार को गुर्जर आरक्षण और मसौदे पर चर्चा के लिए दिनभर मुख्यमंत्री कार्यलय में बैठकों का दौर चला। दोपहर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुआई में कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई। 

 

कैबिनेट की बैठक में 2 घंटे चली चर्चा 

इसके बाद शाम को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। इसमें गुर्जर और सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर करीब दो घंटे चर्चा हुई। संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सरकार ने अपने घोषणा पत्र में साफ लिखा है कि कानून बनाकर गुर्जरों को 5% आरक्षण देने का काम करेंगे। मसौदे को लेकर आईएएस नीरज के. पवन ने सवाईमाधोपुर में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से भी मुलाकात की। 

 

आंदोलन तेज करने की दी थी चेतावनी

गुर्जर आरक्षण आंदोलन संघर्ष समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष भूरा भगत ने मंगलवार को कहा, ‘‘सरकार का प्रतिनिधिमंडल सकारात्मक जवाब देने की बात कह कर गया था, लेकिन अब तक कोई संदेश नहीं आया। ऐसे में अब गुर्जर समाज को अपना आंदोलन तेज करना होगा।’’ प्रशासन ने भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक में सुरक्षा बढ़ा दी है। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से अतिरिक्त सुरक्षा बल मंगवाया गया है। आठ जिलों में राजस्थान सशस्त्र बल की 17 कंपनियों की तैनात की गईं। रेलवे स्टेशन और ट्रैक की भी सुरक्षा की जा रही है।

 

आंदोलन के चलते कई जगहों पर यातायात बाधित

कोटपूतली से नीमकाथाना, हिंडौन से करौली, सवाईमाधोपुर से धौलपुर और दौसा से आगरा का मार्ग पूरी तरह से बंद है। इन मार्गों पर बसों के साथ अन्य वाहनों का संचालन बंद है। दौसा-आगरा की वजह से रोडवेज को सबसे अधिक राजस्व का नुकसान हुआ है। इस मार्ग के बंद होने से यूपी के 50 प्रतिशत शहरों का संपर्क टूट गया है।