रांची। झारखंड में सितंबर 2018 तक 27663.72 हेक्टेयर भूमि को भू-माफियाओं की ओर से अतिक्रमण कर लिया गया है। वन भूमि अतिक्रमण रोकने और अतिक्रमित वन भूमि को मुक्त कराने के लिए दिसंबर महीने तक 7885 वन वाद के मामले दर्ज किये गये है।
वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्त्तन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वन भूमि अतिक्रमण खाली कराने के लिए 4939 वाद बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम के तहत दर्ज किये गये है। इन वादों के निस्तारण के फलस्वरूप तथा वन रोपण कार्य कराकर, वन सीमा स्तंभ स्थापित कर तथा अन्य कार्य करा कर 2359.69हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त करायी गयी। इसके अलावा राज्य में अवस्थित 12,23,843 वन सीमा स्तंभों में से विगत वर्षां में 5,27,875वन सीमा स्तंभों की स्थापना की गयी। साथ ही शहरी क्षेत्रों के निकट 11 स्थलों पर वन भूमि को चाहरदीवारी बनाकर सुरक्षित किया गया तथा तीन अन्य स्थलों की घेराबंदी करने की कार्रवाई की जा रही है।
विभाग की ओर से यह जानकारी दी गयी है कि वन भूमि अभिलेख के अद्यतनीकरण कर उनका संधारण करने के लिए राज्य सरकार द्वारा संबंधित क्षेत्रीय व मुख्य वन संरक्षकों की अध्यक्षता में समितियां गठन की गयी है। इनके द्वारा भारतीय वन अधिनियम के तहत अधिसूचित वन भूमि से संबंधित आंकड़ों का संग्रहण किया जा रहा है। प्राप्त प्राथमिक प्रतिवेदनों के आधार पर राज्य में भारतीय वन अधिनियम के तहत अधिसूचित वन भूमि का रकबा 22.566 लाख हेक्टेयर है। राज्य की वन भूमि अतिक्रमण के लिए संवेदनशील कई कारणों से हो रही है।इसमें शहरों के निकट की वन भूमि के दामों में अत्याधिक वृद्धि तथा बढ़ती जनसंख्या शामिल है। कुछ मामलों में वन भूमि के अभिलेखों में स्पष्टता के अभाव का लाभ भी अतिक्रमणकारियों द्वारा उठाया गया है। वन विभाग द्वारा वन भूमि अतिक्रमण का सतत अनुश्रवण कर वन भूमि अतिक्रमण रोकने और अतिक्रमित वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई लगातार की जा रही है। इसमें से वृहद रूप से अभिलेखों का डिजिटाइजेशन तथा वन सीमा स्तंभों की स्थापना शामिल है।