रांची। झारखंड में हाल के वर्षां में जंगली हाथियों का उत्पात बढ़ा है और जंगल कम होने तथा भोजन एवं पानी की तलाश में जंगली हाथियों का झुंड लगातार आबादी वाले इलाके में घुस आ रहा है, जिसके कारण जंगली हाथियों और ग्रामीणों के बीच टकराव भी बढ़ा है। वर्ष 2014-15 से लेकर 2017-18 के दौरान जंगली जानवरों ने 312 लोगों को मार डाला। इसमें से अधिकांश ग्रामीणों की मौत जंगली हाथियों की चपेट में आने के कारण हुई।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में जंगली जानवरों से 53 लोगों की मौत हो गयी, जबकि वर्ष 2016‘16 में 66, वर्ष 2016-17 में 59 और वर्ष 2017-18 में 84 लोगों की मौत हो गयी।
वन विभाग द्वारा हाथी-मानव द्वंद और जान-माल की क्षति रोकने के लिए स्थानीय ग्राम वन समितियों को हाथी भगाने के लिए मशाल, पटाखा और टार्च का वितरण तथा गश्ती के लिए मजदूरी राशि आवश्यकतानुसार उपलब्ध करायी जाती है। इसके अलावा सामयिक आवश्यकता का आकलन कर विशेषज्ञ दलों को भी नियोजित किया जाता है। विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावित स्थलों का शीघ्रतापूर्वक दौरा कर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए 11 क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। वहीं मुख्य सचिव ने दिसंबर महीने में ही सभी जिलों के उपायुक्तों और आरक्षी अधीक्षक को भी जंगली हाथियों के प्राकृतिक पर्यावास से बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में आ जाने से ग्रामीणों की भीड़ को हटाने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का प्रयोग कर जान-माल की क्षति रोकने के लिए निर्देश दिये गये है। जंगली हाथियों के अलावा भालू, सियार, चीता समेत अन्य जंगली जानवरों ने भी कई ग्रामीणों की जान ली है।