भोपाल। बीते दिनों शहर में हुई हत्या, डकैती जैसी गंभीर वारदातों का आज तक खुलासा नहीं हो सका है। ऐसा प्रतित हो रहा कि इन सभी जघन्य वारदातों की जांच लंबे समय से ठंडे बस्ते में चली है। हत्या कर भोपाल में लाशें ठिकाने लगाने का मामला हो या रातीबड़ में सिक्युरिटी एजेंसी संचालक के घर में डकैती या फिर शाहजहांनाबाद में इंदौर के व्यापारी से लूट हो, इनमें से किसी भी मामले का पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। इनमें से अंधे कत्ल के एक मामले में तो एसआईटी (स्पेशल इन्वेटिगेशन टीम) भी बनाई गई थी, लेकिन उसे भी कोई सफलता नहीं मिल पाई है। जानकारी के अनुसार पिछले छह माह में आधा दर्जन से ज्यादा हत्या कर बदमाशों ने लाशों को शहर में ठिकाने लगाया है। अगस्त 2018 में गांधी नगर में एक युवती और युवक के शव जली हालत में मिले थे। लेकिन शवों से ऐसा कोई साक्ष्य नही मिला था, जिससे उनकी पहचान की जा सके। इसके बाद टीलाजमालपुरा में 26 दिसंबर को एक महिला के पैर मिले, उसके बाद 8 जनवरी को गांधीनगर में उस महिला का धड़ मिला था। उसके शरीर का बाकी हिस्सा बरामद नहीं हो पाया है। एएसपी नीरज सोनी ने मामले के खुलासे के लिए गांधी नगर और टीलाजमालपुरा के चुनिंदा पुलिस अफसरों की एसआईटी बनाई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया है। एक अन्य वारदात में 11-12 मार्च 2018 की दरमियानी रात रातीबड़ थाना क्षेत्र में खिड़की की ग्रिल काटकर 68 वर्षीय कृष्णा पांडे के घर में घुसे बदमाशों ने डकैती को अंजाम दिया था। बदमाश उनकी पत्नी के कान से टॉप्स नोंचकर फरार हो गए। 
    इसके बाद 23 जनवरी 2019 को पूजा कॉलोनी में नीलबड़ में सुरक्षा एजेंसी संचालक एसएन पांडे के घर में डकैती हुई। इसमें आरोपितों की संख्या 6 से 7 बताई गई थी, लेकिन पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज किया था। पहले मामले में टीआई रातीबड़ रहे अशोक गौतम को लाइन अटैच कर दिया था। दूसरी वारदात में संदिग्धों को लेकर पूछताछ हुई। दोनों मामलों की जांच ठंडे बस्ते में हैं। शाहजहांनाबाद में इलाके में 29 जनवरी को इंदौर के किराना व्यापारी के साथ लूट हुई। यह वारदात सीसीटीवी में कैद हुई। फुटेज भी मिले, लेकिन पुलिस मामले का खुलासा करने में कामयाब नहीं हुई। इधर, मंगलवारा में मुरैना के मावा कारोबारी से भी लूट हुई। पुराने बदमाशों से पूछताछ, कॉल डिटेल निकाली, क्राइम ब्रांच को भी लगाया। रिटायर्ड डीआईजी एसके शर्मा का कहना है कि कई बार पुलिसकर्मियों के बीच समन्वय की कमी हो जाती है । इससे छोटी- छोटी जानकारी साझा नहीं की जाती है। ऐसे में कई आपराधिक घटनाओं का खुलासा नहीं हो पाता है या फिर घटना के समय जांच से जुड़े अफसर का तबादला हो जाता है। ऐसे में अपराधों के खुलासे में सफलता नहीं मिलती है। आला पुलिस अफसरों ने शहर में ऐसे रसूखदार नए थानेदारों को रातीबड़ और कोलार जैसे बड़े थानों में प्रभारी बना रखा है, जिन्हें सब इंस्पेक्टर की नौकरी का अनुभव ही दो साल ही हुआ है, जबकि 27 साल की नौकरी करने वाले चूनाभट्टी में तैनात हैं। इस बारे में पुलिस महानिरीक्षक इरशाद वली का कहना है कि  जितने भी पुराने लंबित मामले हैं, उन पर पुलिस लगातार वर्क कर रही है। कोशिश है कि इनका जल्द से जल्दी खुलासा किया जाएगा।