भोपाल। भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों में प्रत्याशी टिकट पाने जोर-आजामइश कर रहे हैं। बुधवार को दोनों ही दलों के नेताओं की दिल्ली मे बैठक हुई। भाजपा की मशक्कशत आखिरी स्तर पर चल रही है। मप्र के लोकसभा प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह की रिपोर्ट के आधार पर भाजपा टिकट वितरण करेगी। खास बात यह है कि सिंह की रिपोर्ट में एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर चेहरा बदलने की भी सिफारिश की है। साथ ही उन्होंने हर लोकसभा सीट से दावेदारी कर रहे नेताओं की भी सूची बनवाई है।  उप्र के परिवहन मंत्री स्वदेव देव सिंह पिछले दो महीने से मप्र के सभी जिलों का दौरा कर चुके हैं। जबकि वे मप्र में पिछले एक साल से दौरा कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोकसभा क्षेत्रों में ज्यादा समय बिताया है, जहां भाजपा संासद के खिलाफ कार्यकर्ता एवं जनता में नाराजगी है। इसके लिए वहां उन्होंने जिला पदाधिकारियों से लेकर मंडल पदाधिकारियों तक से लोकसभा प्रत्याशी को लेकर फीडबैक लिया है।


पसंदीदा चेहरों पर ध्यान
भाजपा बड़े और नाम के चेहरों को टिकट देने से बच रही है। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि भाजपा ऐसे चेहरों को उतारेगी जिसकी जीत तय हो और वह विवादित न हो। खराब परफॉर्मेंस वाले सांसदों का नाम कटना तय है।

ये चेहरे बदले जाएंगे
विदिशा सीट से सांसद सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया है। इसी तरह खजुराहों सांसद नागेन्द्र सिंह विधायक बन चुके हैं। देवास सांसद मनोहर ऊंटवाल भी विधायक बन चुके हैं। बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निरस्त हो चुका है। यह सीट अजजा के लिए आरक्षित है। ऐसे में ज्योति का टिकट कटना लगभग तय है। वहीं इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन का भी टिकट कट सकता है। मुरैना एवं ग्वालियर सीट पर प्रत्याशियों की अदला-बदली हो सकती है। मुरैना सांसद अनूप मिश्रा भितरवार से विधानसभा चुनाव हार गए थे, उनके खिलाफ मुरैना संसदीय क्षेत्र में नाराजगी है। ऐसे में उन्हें ग्वालियर से टिकट मिल सकता है। जबकि ग्वालियर सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर एक बार फिर मुरैना से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि तोमर की भोपाल से चुनाव लडऩे की भी अटकलें हैं।


कांग्रेस में भी अंतिम दौर की चर्चा
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 20 सीटों के नाम तय कर दिये हैं, इन पर अंतिम स्तर पर निर्णय लिया जाना बाकि है। जल्द ही अधिकृत सूची जारी की जाएगी। गुना-शिवपुरी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का टिकट पक्का है। वहीं, छिंदवाड़ा से कमल नाथ के पुत्र नकुल नाथ के नाम पर सहमति बन गई है। 2014 के चुनावों में 29 में से यह दो सीटें ही कांग्रेस बचा पाई थी। इसके बाद उपचुनावों में रतलाम-झाबुआ सीट कांतिलाल भूरिया ने भाजपा से छीन ली थी। ऐसे में कांतिलाल का टिकट भी पक्का माना जा रहा है। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया को ग्वालियर से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। फिलहाल ग्वालियर से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सांसद हैं। खबर हैं कि तोमर अपनी सीट बदल सकते हैं। 

सिंधिया को तरजीह
भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले ग्वालियर में सिंधिया परिवार का भी उतना ही दबदबा है। स्वर्गीय माधवराव सिंधिया ने जिस तरह कांग्रेस को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाया उसके बाद सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया महल के वर्चस्व को ग्वालियर चम्बल संभाग से लेकर प्रदेश के कई संभागों तक ले गए, यही कारण है कि आज कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया की बात को तबज्जो देता है। जिस तरह विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण को लेकर सिंधिया की चली, माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में भी राहुल गांधी, सिंधिया की  पसंद का ध्यान रखें।
  
अशोक सिंह सिंधिया की चुनौती
ग्वालियर में कांग्रेस के पास प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया और प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह का नाम है।  माना ये जा रहा है कि अशोक सिंह पिछले तीन लोकसभा चुनाव हार चुके हैं जिसमें एक उपचुनाव भी शामिल हैं, इसलिए तय गाइडलाइन में वे फिट नहीं बैठते तो उनका टिकट कट सकता है। ग्वालियर ग्रामीण जिलाध्यक्ष मोहन सिंह राठौड़ भी टिकट के लिए जुगाड़ कर रहे हैं।  

तोमर-मिश्रा बदल सकते हैं सीट 
ग्वालियर सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी असमंजस की स्थिति में हैं।  पार्टी का एक धड़ा तो मौजूदा सांसद नरेंद्र सिंह तोमर को ही चुनाव लड़ाना चाहता है  लेकिन अंदरखाने की बात ये है कि नरेंद्र सिंह तोमर खुद भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे कहाँ से चुनाव लड़ेंगे। उनके सीट बदलने को लेकर चर्चाएं विधानसभा परिणामों के बाद से शुरू हो गई थी। भोपाल सीट पर भी उनके नाम पर चर्चा हुई थी। वहीं मुरैना सांसद अनूप मिश्रा के भी सीट बदलने को लेकर चर्चाएं हैं। मुरैना में काम नहीं करने के आरोप उनपर लगते रहे हैं, यहां तक कि  मुरैना में सांसद लापता के पोस्टर भी चिपक गए थे  जो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए थे।  भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पार्टी अनूप मिश्रा को ग्वालियर और नरेंद्र सिंह तोमर को मुरैना भेज सकती है।  क्योंकि तोमर पिछली बार इस सीट से जीत चुके हैं और अनूप मिश्रा को गृह जिला होने और अटल जी का भांजा होने के नाते सिमपैथी वोट का लाभ यहां मिल सकता है।