न्यूर्याक । विगत वर्षों में हेल्थ सप्लिमेंट्स का इस्तेमाल कई गुना बढ़ा है, आमतौर पर मल्टी-विटामिन्स को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता रहा है। अगर शरीर में ज़रूरी तत्व और विटामिन्स की कमी है, तो उसे मल्टी-विटामिन्स के ज़रिए पूरा किया जाता है, लेकिन अब जो बात सामने आई है उस पर गौर करें तो मल्टी-विटामिन्स से हार्ट संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिका में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, जब बात हार्ट संबंधी बीमारियों को रोकने की आती है तो हेल्थ सप्लिमेंट्स का या तो बेहद कम असर होता है या फिर वे बेअसर होती हैं। वहीं कुछ हार्ट संबंधी बीमारियों के रिस्क को बढ़ा देती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इन निष्कर्षों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने वाला है क्योंकि बीते कुछ सालों में हेल्थ सप्लिमेंट्स का इस्तेमाल कई गुना बढ़ा है। यहां लोग या तो खुद ही हेल्थ सप्लिमेंट्स का प्रयोग करते हैं या फिर डॉक्टर ही उन्हें प्रस्क्राइब करते हैं। आंकड़ों से पता चला है कि अमेरिका में 52 पर्सेंट आबादी ये सप्लिमेंट्स लेती है। 31 पर्सेंट आबादी मल्टी-विटामिन लेती है, जबकि 19 पर्सेंट आबादी विटामिन डी, 14 पर्सेंट आबादी कैल्शियम तो वहीं 12 पर्सेंट आबादी विटामिन सी लेती है। कैंसर और न्युट्रिशन डेटा को लेकर रिसर्च करने वाली यूरोपियन प्रॉस्पेक्टिव इन्वेस्टिगेशन कंपनी के आंकड़ों से भी यह बात ज़ाहिर हुई कि वहां कि आबादी भी सप्लिमेंट्स लेती है, जैसे कि डेनमार्क में 51 पर्सेंट पुरुष तो 66 पर्सेंट महिलाएं सप्लिमेंट्स का सेवन करती हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो चूंकि ये सप्लिमेंट्स मेडिकल स्टोर या केमिस्ट काउंटर पर आसानी और ढेर सारी मात्रा में मिल जाते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि ये हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हैं और ड्रग कंपनियां लोगों की इन्ही भावनाओं का गलत फायदा उठा रही हैं। उन्हें विश्वास दिलाया जाता है कि अगर वे मल्टी-विटामिन्स लेंगे तो कम थकान महसूस करेंगे और फिजिकली फिट रहेंगे।