रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहले चरण में बस्तर संसदीय सीट पर मतदान होना है। यह इलाका आदिवासी बहुल है। बस्तर संभाग के सात में से छह जिले पहले चरण की बस्तर सीट में शामिल हैं। ये सारे जिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना महत्वाकांक्षी जिलों में शामिल हैं। महत्वाकांक्षी या एस्पिरेशनल जिले वे हैं जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए थे। इन जिलों में मानव विकास सूचकांक का स्तर भी नीचे थे।

मोदी ने अपने कार्यकाल के चौथे साल में महत्वाकांक्षी जिलों की योजना लागू की। 17 वीं लोकसभा के चुनाव से पहले इन जिलों को विकास के लिए सिर्फ एक साल का समय मिला। फिर भी बस्तर के कुछ जिलों ने विकास की दौड़ में बेहतर प्रदर्शन किया है। महत्वाकांक्षी जिलों का विकास चुनाव में क्या असर डालेगा यह देखा जाना बाकी है।
बस्तर के जंगलों में बसे गांवों तक इन एक सालों में बैंकों की शाखाएं पहुंची हैं। अंदरूनी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू की गई। प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों में दवा और डाक्टर का इंतजाम किया गया। दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर जिलों में भी काफी काम हुआ।

पीएमजीएसवाय योजना से सैकड़ों सड़कें मंजूर की गई। जिला मुख्यालयों में बाजार का विकास किया गया। बीजापुर जिले में जिला अस्पताल को आधुनिक बनाया गया। इस साल मार्च में जारी रैंकिंग में कोंडागांव जिले ने स्वास्थ्य और पोषण में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
सभी इंडिकेटर के लिहाज से देश के 115 महत्वाकांक्षी जिलों में कोंडागांव दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि के लिए कोंडागांव जिले को पांच करोड़ का पुरस्कार भी मिला। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस उपलब्धि के लिए कोंडागांव जिले को बधाई दी।

जहां मोदी गए थे वहां अब भी चल रहे बैंक और आंगनबाड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल 14 अप्रैल को बीजापुर जिले के धुर नक्सल प्रभावित जांगला गांव गए थे। यहां से उन्होंने आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान वे जांगला के उस केंद्र भी गए थे जहां एक ही परिसर में पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी, बैंक, पोस्ट ऑफिस, काल सेंटर आदि है।

मोदी ने इस केंद्र का अवलोकन किया था। जांगला में यह केंद्र अब भी चल रहा है। बीजापुर में मोदी के आगमन के बाद इस जिले ने सूचकांक में 45 अंक की छलांग लगाई थी।
कौन हैं महत्वाकांक्षी जिले-

देशभर में 115 जिलों को पिछड़ा माना गया है। इन्हें महत्वाकांक्षी जिले नाम दिया गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शामिल बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडांगांव, नारायणपुर और कांकेर के साथ ही राजनांदगांव, कोरबा और महासमुंद जिलों को इस सूची में शामिल किया गया है।
यहां बात होगी विकास की

लोकसभा चुनाव में दूसरी जगहों पर चाहे कुछ भी मुद्दा हो इन जिलों में विकास का मुद्दा सबसे ऊपर रहने वाला है। इन जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास, अधोसंरचना निर्माण, जल संसाधन, वित्तीय प्रबंधन, विद्युतीकरण आदि के सूचकांकों के आधार पर विकास का पैमाना तय किया गया है।

नीति आयोग ने इन जिलों के लिए केंद्र सरकार की ओर से ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी तैनात किए हैं। इन जिलों में केंद्र और राज्य की अटकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने का काम किया जा रहा है। ऐसे में यहां विकास की ही बात होनी है। यहां से चली विकास की बहस प्रदेश की दूसरी सीटों तक भी पहुंचेगी जरूर।