जबलपुर। भारतीय वायुसेना की मांग पर शहर की ग्रे आयरन फाउंड्री (जीआईएफ) में अब 250केजी एचएसएलडी बम का उत्पादन किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने सेना की मांग पर ओएफबी द्वारा जीआईएफ को इन बमों का इंडेंट (उत्पादन लक्ष्य) भी दे दिया है। हवा में उड़ते युद्धक विमान द्वारा दुश्मन सेना का सफाया करने के लिए जमीन पर गिराए जाने वाले इस विध्वंसक बम का शहर की निर्माणी में पहली बार उत्पादन होगा।

सूत्र बताते हैं कि जीआईएफ के पहले 250 केजी एचएसएलडी बम बनाने का काम आयुध निर्माणी मुरादनगर (यूपी) में होता रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सेना की मांग पर 250 केजी बनाने की जवाबदारी देश की दूसरी आयुध निर्माणी को सौंपी है। इसे लेकर यह भी सामने आया है कि जीआईएफ का बीते दो वर्षों का उत्पादन और यहां किए गए प्रयोग सफल रहे हैं। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने ओएफबी को इस निर्माणी का काम बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
अभी शुरू किया काम

जीआईएफ में 250 केजी बम का पहला खोल ढाला गया। निर्माणी में बनाए गए इस बम के खोल की विभिन्न पैमानों पर जांच की जाएगी। इसके बाद जीआईएफ में जून से इन बमों का विधिवत उत्पादन कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
पहली खेप में 300 बम

सुरक्षा निर्माणी जीआईएफ वित्तीय वर्ष 2019-20 में 250 केजी एफएसएलडी के कुल 300 नग का उत्पादन करेगी। इस कार्य के चलते क्वालिटी कंट्रोलर और एग्जामिनर नजर बनाकर रखेंगे। निर्माणी के पूरी तरह सफल होने पर बम उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाया जा सकता है।
वीएफजे इस माह बनाएगा 50 सुरंगरोधी वाहन

सैन्य वाहन निर्माणी वीएफजे इस माह 50 सुरंगरोधी वाहन (माइंस प्रोटेक्टिव वीकल) बनाएगी। इन वाहनों की खेप जल्द ही सेना के हवाले करने निर्माणी के कर्मचारी तेजी से काम करने भी तैयार हैं। जबकि भारत-पाक के बीच तनाव की स्थिति बनने पर सेना ने वीएफजे के लिए 108 सुरंगरोधी वाहन इसी माह बनाकर देने का आदेश (इंडेंट) भेजा था।
श्रमिक नेता बताते हैं कि निर्माणी प्रशासन ने ओएफके के माध्यम से सेना द्वारा दिए गए माइंस प्रोटेक्टिव व्हीकल (एमपीवी) के उत्पादन लक्ष्य के अनुसार रॉ-मटेरियल खरीदी करने के आदेश जारी कर दिए हैं। उम्मीद है कि निजी उपक्रमों से यह रॉ-मटेरियल जल्द ही निर्माणी को मिल जाएगा, जिसके बाद एमपीवी बनाने के लिए सभी कलपुर्जे होंगे। निर्माणी के कर्मचारियों के लिए पर्याप्त मात्रा में रॉ-मटेरियल मिलते ही सुरंगरोधी वाहनों का निर्माण कार्य तेज गति से शुरू करके पूरा किया जाएगा।

50 ढांचे तैयार
निर्माणी के कर्मचारी सेना की मांग पर सुरंगरोधी वाहन बनाने पहले से तैयार रहे। इसलिए निर्माणी के प्लांट में 50 सुरंगरोधी वाहनों के ढांचे (जिन्हें कर्मचारी हल कहते हैं) तैयार रखे हैं। वर्तमान में कर्मचारी इन ढांचों में उपलब्ध कलपुर्जों को लगाकर बनाने का काम कर रहे हैं।

टायर, बैटरी की कमी

निर्माणी में सुरंगरोधी वाहनों को पूरा बनाने के लिए अभी टायर, बैटरी सहित कमानी के यू-बोल्ट की कमी भी चल रही है। तो यह बख्तरबंद वाहन बनाने के लिए बुलेटप्रूफ चादर भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है। निर्माणी के आदेश पर रॉ-मटेरियल आते ही ढांचे में अन्य कलपुर्जे लगाकर सुरंगरोधी वाहन बनाए जाएंगे।