भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व सख्त फैसलों के लिए जाना जाता है, दिल्ली नगर निगम के चुनावों में पार्टी ने एक ही झटके में सभी सीटिंग सभासदों का टिकट काट दिया. इसी तरह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में दर्जनों विधायकों और मंत्रियों का टिकट भी काट दिया था. पार्टी ने छत्तीसगढ़ के सभी सीटिंग सांसदों का टिकट काटना का सख्त फैसला भी एक झटके में ले लिया तो आखिर ऐसा क्या है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में टिकट बटवारे में इतनी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है.

सूत्रों की माने तो पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व चाहता है कि 75 साल के बड़े नेता चुनाव न लड़े, लेकिन पार्टी नेतृत्व खुद इस बात को बोलना नहीं चाहता है. वह चाहता है कि नेता खुद ये बात मीडिया से कहें ताकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर वरिष्ट नेताओं का टिकट कटने का आरोप न लगे. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कई बार अलग-अलग माध्यमों से इन नेताओं को संदेश भी भेजवाया, लेकिन कोई भी नेता सक्रिय राजनीति छोड़ने को तैयार नहीं है. मध्य प्रदेश में जहां बाबू लाल गौर लगातार बयानों के जरिए पार्टी पर दबाव बना रहे हैं, वही उत्तर प्रदेश में मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र अपने चुनाव क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर पार्टी पर दबाव बनाए हुए हैं. ऐसे में पार्टी के सामने इन दोनों का टिकट काटना बड़ी चुनौती है.
आसान नहीं है इन दोनों का टिकट काटना

कलराज मिश्रा के करीबी नेताओं का दावा का पार्टी अध्यक्ष अमित शाह यदि पहले बुलाकर कलराज जी को चुनाव न लड़ने के बदले कोई प्रस्ताव देते तो कलराज जी आसानी से मान जाते, लेकिन क्षेत्र में चुनाव प्रचार शुरु करने के बाद टिकट कटने से कार्यकर्ताओं में ये संदेश जाएगा कि पार्टी ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है. बात करें मुरली मनोहर जोशी की तो जोशी जी पहले से पार्टी से नाराज चल रहे हैं. ऐसे में पार्टी अगर उनका टिकट काटती है तो उन्हें मुखर होने का मौका मिल जाएगा. संतकबीर नगर जूताकांड के बाद वहां के सांसद शरद त्रिपाठी का टिकट कटना भी तय माना जा रहा है.
शरद त्रिपाठी के पिता रमापति राम त्रिपाठी एक दौरे में बीजेपी का ब्राह्मण चेहरा रह चुके हैं और गोरखपुर के आस-पास के इलाके में उनकी अच्छी खासी पकड है. उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण एक मजबूत वोट बैंक है. बीजेपी 10 फीसदी मतादाता वाले ब्राह्मण वोट बैंक को कभी भी नाराज नहीं करना चाहेगी. कलराज मिश्रा और मुरली मनोहर जोशी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सबसे मजबूत बाह्मण चेहरे हैं. बीजेपी ने महेन्द्र नाथ पांडे को भले ही पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया हो लेकिन वो चुनाव में इन दोनों की जगह नहीं ले सकते. दूसरी और प्रियंका गांधी वाड्रा को मैदान में उतार कर कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेल दिया है. ऐसे में अगर बीजेपी से ब्राह्मण नाराज होता है तो वो कांग्रेस में जाने से नहीं हिचकिचाएगा.

पूर्वांचल में बढ़ जाएगी मुश्किल

उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से देखने वाले वरिष्ट पत्रकार अम्बरीश कुमार का मानना है कि उत्तर प्रदेश में तीन राज्यों में हार और एसपी-बीएसपी गठबंधन होने के बाद बीजेपी 75 वर्ष से ज्यादा उम्र के नेताओं का टिकट काटने के फैसले से पीछे हट गई थी. ऐसे समय प्रियंका की एंट्री ने बीजेपी की राह और मुश्किल कर दी है. अम्बरीश कुमार कुमार का मानना है कि जोशी को भले ही बीजेपी पहाड़ी ब्राह्मण बताकर किनारा कर ले लेकिन कलराज का टिकट काटना पार्टी पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि प्रदेश के जिस इलाके से कलराज संसद में आते हैं. योगी के सीएम बनने के बाद वहां ठाकुर-ब्राह्मण आमने सामने हैं और ऐसे में बीजेपी योगी के सीएम बनने के बाद कलराज जैसे बड़े ब्राह्मण नेता के टिकट काटने का दाव उल्टा पड़ सकता है.