घर का वास्तु हमारे जीवन के आर्थिक और सामाजिक पक्ष पर ही असर नहीं डालता। बल्कि वास्तु हमारी भावनाओं को भी नियंत्रित करता है। जी हां, थोड़ी चौंकाने वाली बात जरूर है लेकिन वास्तु पर अनेक पुस्तकें लिख चुके वास्तुविद कुलदीप सूलजा ने यह बात अपनी पुस्तक ‘संपूर्ण सायंटिफिक वास्तु’ में बताई है। इस पुस्तक के अनुसार, घर के मुख्य द्वार को देखकर आप उस घर के मालिक की पसंद और स्वभाव के बारे में जान सकते हैं…
जिस घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में पूर्व दिशा में स्थित होता है, उस घर का मालिक स्वभाव से दयावान, विचारशील, धार्मिक, दिलेर और अध्ययन में रुचि रखनेवाला होता है।
जिस घर का मुख्य द्वार ईशान या अग्नेय कोण में स्थित न होकर पूर्व दिशा की दीवार पर मध्य में स्थित हो, उस घर का मालिक और उस घर में रहनेवाले लोग काफी महत्वाकांक्षी होते हैं।
अग्नेय कोण यानी पूर्व और उत्तर के कोने में पूर्व की तरफ घर का मुख्य द्वार होने पर घर में कलह का वातावरण रह सकता है। साथ ही चोरी होने का भय बना रहता है।
अग्नेय कोण में दक्षिण दिशा में घर का मुख्य दरवाजा होने पर घर का मुखिया बहुत साहसी और निडर होता है। लेकिन साथ ही गुस्सैल हो सकता है और उसके स्वभाव में चंचलता अधिक हो सकती है।
नैऋत्य कोण अर्थात दक्षिण और पश्चिम दिशा का कोना। इस कोण में अगर दक्षिण की दिशा में घर का मुख्य द्वार होता है तो इस घर में रहनेवाली महिलाएं गंभीर बीमारियों से परेशान रहती हैं। जिस कारण घर का मुखिया आर्थिक और मानसिक दबाव में रहता है।
नैऋत्य कोण की पश्चिम दिशा में घर का मुख्य दरवाजा होने पर घर का मुखिया तामसिक, धूर्त और गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है। घर के अन्य पुरुषों के लिए भी इस दिशा का मुख्य द्वार हानिकारक होता है।
वायव्य कोण अर्थात उत्तर और पश्चिम दिशा का कोना। जिस घर में वायव्य कोण की पश्चिम दिशा में घर का मुख्य द्वार होता है, उस घर के मुखिया का स्वभाव चंचल, भावुक और अस्थिर हो सकता है। इन्हें यात्राएं करना पसंद होता है।
घर के वायव्य कोण में उत्तर दिशा में घर का मुख्य दरवाजा बहुत दुख देनेवाला होता है। इसके कारण घर के मुखिया के जीवन में कलह, बदनामी, मुकदमेबाजी की स्थिति बनी रह सकती है।