बीकानेर एवं पाली जिले में बीजेपी ने वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के विरोध को दरकिनार कर अपने मौजूदा सांसदों पर ही विश्वास जताया है. इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मौजूदा सांसदों का विरोध करते हुए उन्हें टिकट नहीं देने की मांग की थी.
बीकानेर के मौजूदा सांसद एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल का पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने खुलकर विरोध किया था और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी. उसके बावजूद मेघवाल को टिकट दिए जाने की संभावना को देखते हुए भाटी ने गत शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मेघवाल ने विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया और वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लगे रहे. उन्होंने कहा कि वे नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के प्रयासों के साथ हैं, लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे नेताओं का साथ पसंद नहीं कर सकते.
वहीं पाली लोकसभा क्षेत्र में भी पार्टी के मौजूदा एंव पूर्व जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने मौजूदा सांसद एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री पीपी चौधरी को टिकट नहीं देने की मांग की थी. इस संबंध में चौधरी के विरोधी खेमे के राज्यसभा सांसद रामनारायण डूडी, पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक पुष्पेन्द्र सिंह, शोभा चौहान, पूर्व विधायक कमसा मेघवाल, भैराराम सियोल, मदन राठौड़, संजना आंगरी, केसाराम चौधरी और अर्जुन गर्ग समेत पाली जिला प्रमुख पेमाराम सिरवी तथा जोधपुर जिला प्रमुख पूनाराम चौधरी ने लोकसभा चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर को पीएम मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा था. उसके बाद उन्होंने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से भी मुलाकात कर अपनी बात रखी थी. इन्होंने चौधरी पर कांग्रेस समर्थित निजी व्यक्तियों को तव्वजो देने का आरोप लगाया था.