रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की प्रतिभा खोज परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है। पहले ही चरण की परीक्षा अफसरों की लापरवाही से विवादों में फंस गई है। आलम यह है कि यहां एससीईआरटी के चंद अफसरों ने इस परीक्षा में जमकर लापरवाही की। परीक्षार्थियों को बिना मॉडरेट किया हुआ पेपर थमाया गया। मॉडरेशन और प्रकाशन के दौरान इन प्रश्न पत्रों की अनदेखी तो हुई ही, साथ ही परीक्षा के बाद भी अफसरों ने गलती छुपाने के लिए जमकर खेल भी खेल डाला।

बताया जाता है कि गड़बड़ियों को छुपाने के लिए अफसरों ने कइयों के दावा-आपत्तियों को भी शामिल करने में आनाकानी तक की। आखिरकार छात्रों की बार-बार शिकायत और दावा-आपत्ति के बाद एससीईआरटी के अफसरों को मजबूरी में तीन बार लगातार कमेटी गठित करनी पड़ी। 28 गलत सवालों को डिलीट करना पड़ गया। राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में गलत सवालों के कारण मेधावियों को न्याय नहीं मिल पाया। लिहाजा तीन परीक्षार्थियों ने एससीईआरटी से ओएमआर शीट निकलवाकर इसे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। मामले में एससीईआरटी को पार्टी बनाया गया है।

 

छात्रों का आरोप- गलत प्रश्नों को हल करने में फालतू गया समय

छात्रों का आरोप है कि अन्य प्रश्नों को हल करने में भी दिक्कत हुई। टाइम मैनेजमेंट नहीं होने से मेधावियों का भी पर्चा बिगड़ गया। छात्रों को डिलीट हुए सवालों पर बोनस अंक भी नहीं मिल पाया है। प्रश्न पत्र 200 अंकों का पूछा गया था। इनमें हर सवाल मायने रखता है, क्योंकि नेशनल स्तर पर यही परीक्षार्थी देशभर के अन्य परीक्षार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हैं।

 

गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई तक नहीं

एससीईआरटी में इतनी बड़ी कार्रवाई होने के बाद भी इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे चंद अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामले को आखिरी दम तक छिपाते रहे। प्रतिभा खोज की परीक्षा में छात्रों की प्रतिभा को कुचलने का प्रयास इस कदर रहा कि अभी भी छात्र न्याय के लिए भटक रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मॉडरेटर और प्रकाशक को ब्लेकलिस्टेड किया गया है लेकिन इस मामले में परीक्षा की जिम्मेदारी जिन-जिन पर थी, उन्हें नोटिस तक नहीं दिया गया है। मामले में स्कूल शिक्षा सचिव गौरव द्विवेदी ने जांचकर कार्रवाई करने की बात की है।

 

राज्य स्तर की परीक्षा एससीईआरटी के हवाले

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा दो चरणों में होती है । पहली परीक्षा राज्य स्तर पर एससीईआरटी लेता है। पहले चरण के तहत राज्य स्तरीय परीक्षा से मेरिट सूची के आधार पर 90 से 100 विद्यार्थियों को चुना जाता है। राज्य स्तरीय परीक्षा में जो छात्र सफल होंते हैं उन्हीं को एनसीईआरटी द्वारा आयोजित दूसरे चरण की परीक्षा में शामिल होना पड़ता है। प्रथम चरण की परीक्षा में वे ही छात्र शामिल हो सकते हैं, जो 10वीं क्लास में अध्ययन कर रहे हों। यह परीक्षा चार नवम्बर 2018 को हुई थी। इसमें 14 हजार 193 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। अंतिम चरण की परीक्षा 12 मई 2019 को होनी है।

 

पहले ही प्रदेश की हालत खराब

एससीईआरटी की लापरवाही से एक बार राज्य से मेधावियों को प्रतिभा खोज परीक्षा में झटका लगा है। बतादें कि इस परीक्षा में पहले से ही प्रदेश के परीक्षार्थियों की स्थिति बेहद खराब है। केंद्र और राज्य सरकार प्रतिभाशाली छात्रों को कई तरह की स्कॉलरशिप मुहैया कराती है। उनमें से ही एक नेशनल टैलेंट सर्च स्कीम के तहत प्रतिभा खोज परीक्षा ली जाती है। जिसके तहत हर साल कक्षा दसवीं में अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए परीक्षा ली जाती है।

 

छत्तीसगढ़ के आंकड़ों को खंगालें तो पिछले सालों में सरकारी स्कूलों से महज 10 से 15 फीसदी विद्यार्थियों का चयन राज्य एवं केंद्र स्तर पर हो पाया है। बाकी अस्सी से 85 फीसदी प्रतिभाएं निजी स्कूलों से हैं। जानकार इसकी वजह सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बेहतर तरीके से न होना बता रहे हैं। यह परीक्षा 10वीं में अध्ययन करने वाले छात्रों दे सकते हैं। राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के आधार पर कुल एक हजार छात्रों को अवॉर्ड दिया जाता है। स्कॉलरशिप परीक्षा के परिणाम के आधार पर कुल एक हजार छात्रों को हर माह पांच सौ रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है। 1963 से देशभर में प्रतिभा खोज परीक्षा आयोजित की जा रही है।