अगर दिवाली की रात हाथ आने वाली मिठाइयों की मिठास की कल्पना कर आपके मुंह में पानी आने लगा है तो थोड़ा सब्र कीजिए और अपने स्वास्थ्य के बारे में भी सोचिए। सोचिए कि कहीं इस मीठे 'उत्साह' में कोई खतरा तो नहीं छुपा है! सावधानी बरतेंगे तो मिठास के साथ तंदुरुस्ती भी बनी रहेगी।

जानकारों के मुताबिक बेशक मिठाइयां खाना और खिलाना हमारे त्योहारों को मनाने का सबसे अच्छा तरीका है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये मिठाइयां एवं पकवान अपने साथ खुशियां लाने के साथ-साथ टनों कैलोरी भी लाती हैं। कहने की जरूरत नहीं कि ये कैलोरी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकते हैं।

अगर आप शरीर का वजन घटाने की रणनीति बना रहे हैं तो आपको और सचेत हो जाने की जरूरत है। दिवाली के कुछ दिनों का मीठा उत्साह आपके अब तक के सारे किए कराए पर पानी फेर सकता है। अगर आप खुद मिठाइयां बनाने की योजना बना रहे हैं तो कम वसा वाले दूध एवं अन्य सामग्री प्रयोग में लाएं। रिफाइंड चीनी एवं मीठे स्वाद लाने वाले पदार्थ की जगह मधु जैसे प्राकृतिक मिठास का सहारा लेना अच्छा है और अत्यधिक तेल-घी के प्रयोग से तौबा करें।

दिवाली को खुशगवार बनाने के और भी कई तरीके हैं मिठाइयों के सिवा। यही वजह है कि सौगात के लिए आज ड्राइ फ्रूट्स सबसे पहली पसंद बनती जा रही है लेकिन इस मामले में भी सावधानी बरतने की जरूरत है। उनका अत्याधिक सेवन भी खतरनाक है।

चर्बी बढ़ाने वाले भोजन एवं मिठाइयां पेट में पल रहे बच्चों एवं उन माओं के लिए भी खतरनाक हैं जो गर्भ के दौरान मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। दीवाली में इन चीजों का अतिशय सेवन समस्या बढ़ा सकता है। साथ ही  गर्भवती महिलाओं को त्योहारों में अत्याधिक मिठाइयां एवं चर्बी बढ़ाने वाले पदार्थो से परहेज करना चाहिए। पेट में पल रहे बच्चे के लिए मेवा (ड्राईफ्रूट) अच्छा है, लेकिन वह भी एक हद में ही खाएं। घर में पके पकवान सबसे बेहतर होते हैं।