लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले राजस्थान के बड़े गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए हैं. बैंसला ने बुधवार को दिल्‍ली में अपने बेटे विजय बैंसला के साथ  बीजेपी ज्‍वॉइन की. बीजेपी के राजस्थान प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने पिता-पुत्र को पार्टी की सदस्‍यता दिलवाई.
इस दौरान प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि किरोड़ी सिंह बैंसला गुर्जर आंदोलन के बड़े नेता हैं. बैंसला जी के आने से हम राजस्थान 25 की 25 सीटें जीतेंगे.  उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चा एक हफ्ते से चल रही थी. वसुंधरा जी, प्रदेश अध्‍यक्ष और सभी से चर्चा करके ये फैसला हुआ है. सभी वर्गों से समर्थन मिल रहा है. आज सुबह बैंसला जी की बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह से भी मुलाकात हुई. वहीं  कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा कि वो गुर्जर आंदोलन से 14 साल से जुड़े रहे. इस दौरान दोनों पार्टियों के नजदीक रहे लेकिन जो पीएम मोदी में देखने को मिला, वह कहीं नहीं है. वो साधारण लोगों की तकलीफ समझते हैं.
बता दें कि बैंसला गुर्जर समाज के बड़े और नामचीन नेता हैं. इन्‍हें गुर्जर आंदोलन का सबसे बड़ा अगुआ माना जाता है. बैंसला से पहले राजस्थान के एक और बड़े जाट नेता हनुमान बेनीवाल भी बीजेपी में शामिल हुए हैं. लिहाजा अब बैंसला के भी बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी को राजस्‍थान में मजबूती मिलने की उम्‍मीद की जा रही है.
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का जन्म राजस्थान के करौली जिले के मुंडिया गांव में हुआ. कर्नल किरोड़ी जाति से बैंसला यानी गुर्जर हैं. अपने करियर के शुरुआती दौर में बैंसला ने कुछ दिन शिक्षक के तौर पर भी काम किया. हालांकि पिता के फौज में होने के चलते उनका रूझान भी सेना में जाने का हुआ और आखिर वो भी सिफाही के रूप में सेना में भर्ती हो गए.
सेना में सेवा के बाद जब रिटायर होकर कर्नल बैंसला राजस्थान लौटे तो उन्होंने गुर्जर समुदाय के लिए अपनी लड़ाई शुरू की. सार्वजनिक जीवन में आने के बाद वो गुर्जर आरक्षण समिति की अगुआई करते हुए सरकार से अपनी मांगें मनवाने में जुट गए. कई बार आंदोलनों के दौरान रेल रोकी, पटरियों पर धरने पर बैठे और सरकारों को आरक्षण पर फैसले के लिए मजबूर किया. हालांकि उनके इन आंदोलनों में 70 से अधिक लोगों की मौत भी हुईं और कर्नल बैंसला पर सिरफिरा होने और समाज को भटकाने के आरोप भी लगे.