भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव लोकसभा चुनाव 2019 शुरू हो गया है. पहले चरण के मतदान 11 अप्रैल से शुरू हो जाएंगे. ऐसे में मौके पर ज्यादातर राजनेता मुखर हो गए हैं. बातचीत के दौरान कई चुनावी कहानियां सुना रहे हैं. एक ऐसी कहानी एक बार फिर चर्चा में आ रही है जब एक मुख्यमंत्री पद के दावेदार को महज एक वोट से मिली हार के चलते गद्दी नसीब नहीं हो सकी. सियासी गलियारे के कई जानकारों का मानना है कि जब इस राजनेता की एक वोट से हार हुई थी तो उनकी ही पत्नी वोट करने से वंचित रह गई थीं.

राजस्‍थान कांग्रेस अध्यक्ष सीपी जोशी की खराब किस्मत

यह कहानी है, राजस्‍थान के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रह चुके और राहुल गांधी के बेहद करीबी नेता माने जाने वाले नेता सीपी जोशी की. राजस्‍थान के साल 2008 के विधानसभा चुनाव हुए थे. तब प्रदेश कांग्रेस में सबसे कद्दावर नेता सीपी जोशी थे. दूसरे नंबर पर अशोक गहलोत होते थे. चुनाव शुरू हुए तो सीपी जोशी ने अपने सबसे प्रिय सीट नाथद्वारा से पर्चा दाखिल किया.

प्रिय सीट इसलिए कि सीपी जोशी राजस्‍थान की नाथद्वारा पर 2008 से पहले चार बार 1980, 1985, 1998 और 2003 के चुनावों में परचम लहरा चुके थे. लेकिन 2008 में जब उनकी किस्मत को नाथद्वारा की सबसे ज्यादा जरूरत थी तब यह एक वोट से हार गए. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक, खुद सीपी जोशी ने इस बारे में कहा था, "हां यह सच है. उस दिन मेरी पत्नी और बेटी मंदिर गई हुई थी. इस वजह से वे मतदान नहीं कर पाई थीं."

2008 में सीपी जोशी की एक वोट से हार

नाथद्वारा विधानसभा सीट पर साल 2008 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता सीपी जोशी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कल्याण सिंह चौहान को उतारा था. दोनों ने चुनाव प्रचार में पूरी जान लगा दी. राजस्‍थान की चुनावी परंपरा को देखते हुए यह साल कांग्रेस की सरकार बनने की उम्मीद जताई जा रही थी. क्योंकि तब सत्ता में बीजेपी थी और राजस्‍थान की जनता हर पांच साल सरकार बदल देती है.

ऐसे में सीपी जोशी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे. अतिश्योक्ति के तौर पर कहा जाता है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद शपथ लेने की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं. लेकिन ऐन चुनाव वाले दिन उनकी पत्नी किंचित कारणोंवश मतदान के लिए मतदान केंद्र नहीं पहुंच पाईं. नतीजा ये कि उन्हें रिजल्ट वाले दिन उनके खाते में 62215 वोट. जबकि उनके प्रतिद्वंदी को चौहान को 62216 वोट. यानी दोनों में एक वोट का फासला रह गया. सीपी जोशी हार गए और चौहान जीत गए.

1 वोट से हार के बाद क्या हुआ

राजस्‍थान की परंपरा के मुता‌बिक ही साल 2008 के चुनाव में कांग्रेस की ही सरकार बनी. सीएम भी कांग्रेस के ही बने लेकिन वो सीपी जोशी के बजाए अशोक गहलोत हुए. हालांकि सीपी जोशी पर कांग्रेस आलाकमान का हाथ बरकरार रहा. उन्हें साल 2009 के लोकसभा चुनाव में राजस्‍थान के भीलवाड़ा लोकसभा से टिकट दिया गया. वे जीतकर केंद्र में आ गए और पहले पंचायती राज मंत्री बने, फिर सड़क परिवहन मंत्रालय और रेल मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी मिला.