नई दिल्ली। चाइनीज ब्रांड लेनोवो के मालिकाना हक वाली हैंडसेट मेकर मोटोरोला अब इंडिया को अपना एक्सपोर्ट हब बनाना चाहती है।लेनोवो के मोबाइल बिजनस ग्रुप के कंट्री हेड और मोटोरोला मोबिलिटी के एमडी पारसनाथ मणि ने इस बारे में जानकारी दी है। उनका कहना है कि लोकल स्मार्टफोन मार्केट में मुकाबला बहुत बढ़ने के बाद कंपनी ने अपना फोकस वॉल्यूम से हटाकर प्रॉफिटेबिलिटी पर शिफ्ट कर दिया है। मणि ने कहा कि लैटिन अमेरिका और एशिया पसिफिक रीजन के देशों को हैंडसेट कंपनी का एक्सपोर्ट इस महीने के आ‎खिर तक शुरू हो सकता है। उन्होंने बताया कि लेनोवो-मोटोरोला ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग कपैसिटी बढ़ाकर 1.2 करोड़ यूनिट कर ली है, जिसमें एक्सपोर्ट भी शामिल है। उन्होंने कहा, हम डिमांड के हिसाब से कभी भी प्रॉडक्शन बढ़ा सकते हैं। हालांकि उन्होंने निवेश की रा‎‎‎शि के बारे में जानकारी नहीं दी। मणि ने बताया कि कंपनी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (पीसीबी ) का भी काम कर रही है, अमेरिकी मल्टीनैशनल कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर फ्लेक्स (पहले फ्लेक्सट्रॉनिक्स) की सर्विस यूज करके बैटरी और चार्जर बना रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी कंपोनेंट इकोसिस्टम में गहराई लाने के लिए दूसरे पार्ट्स मेकर्स से भी बात कर रही है।
मणि ने कहा कि इंडियन स्मार्टफोन मार्केट में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा बढ़ गया है और कई ब्रांड्स दाम गिराकर 'प्योर प्राइस गेम' पर खेल रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम वॉल्यूम और वैल्यू शेयर की लड़ाई में नहीं हैं। कई बार हमें कुछ चीजों का चुनाव करना पड़ता है। मोटोरोला का टर्नअराउंड करके उसके प्रॉफिटेबल यूनिट बनाना हमारी पहली प्राथमिकता थी।' इंडियन हैंडसेट इंडस्ट्री से टेलिकॉम इंडस्ट्री की तुलना करते हुए मणि ने कहा, 'इस इंडस्ट्री में भी किसी को फायदा नहीं हो रहा है।' इंडियन टेलिकॉम इंडस्ट्री भी कड़े मुकाबले के चलते बड़ी मुश्किल भरे दौर से गुजर रही है। 2018 में लेनोवो और मोटोरोला दोनों ब्रैंड के स्मार्टफोंस का मार्केट शेयर 2 पर्सेंट था। कंपनी पिछले साल लगभग दो लाख यूनिट्स मंथली का एक्सपोर्ट कर रही थी।