रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विवि में नवाचार के अंतर्गत उन्नत प्रशिक्षण के माध्यम से फल, फूल सहित साग-सब्जियों की पैदावार की जा रही है। ताकि किसानों को इन फसलों की पैदावार स्वयं के खेत में लेते समय कीट आदि संबंधी कोई दिक्क्त न आए। प्रमुख तौर पर किस प्रकार की परेशानी आती है, इसे ध्यान में रख कर फसलें तैयार की जा रही है। उन्नत किस्म की फसलों को पाली हाउस में लगाने के साथ- साथ इन्हें कीट, रोग से बचाने के लिए सीएफएल लगाए गए। सीएफएल की रोशनी में सेवंती फूल की बेहतर पैदावार की गई। अब दूसरे फूलों के अलावा पपीता, साग-सब्जियों की पैदावार में यह तकनीक अपनाई जा रही है।

रोशनी से मर जाते हैं कई प्रकार के कीड़े : कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो सीएफएल से जहां आर्द्रता पर नियंत्रण किया जा सकता है वहीं सूक्ष्म कीटों का प्रकोप कम हो जाता है। क्योंकि सीएफएल की रोशनी से कई कीड़े मर जाते हैं, इनकी संख्या में बढोतरी नहीं होती है। इसके चलते फसलों को खासकर कीटों से नुकसान नहीं होता। सामान्य प्रकाश जैसे सूर्य की रोशनी के अलावा करीब पांच से छह घंटे अतिरिक्त लाइट खासकर रात और दिन में मिलने से आर्द्रता में कमी आती है।