इस बार लोकसभा चुनाव में पाकिस्‍तान की एक महिला भी वोट डालेगी। उसके लिए यह माैका किसी त्‍योहार जैसा है और भारत में मतदान का अधिकार मिलने से वह बेहद खुश है। 16 वर्ष पहले गुरदासपुर के कादियां में शादी करने के बाद पाकिस्‍तानी महिला ताहिरा मकबूल को अब जाकर भारत की नागरिकता मिली है। का‍दियां के अहमदिया मोहल्ला की रहने वाली ताहिरा इस बार भारत की नई सरकार चुनने के लिए वोट डालेंगी।

2003 में गुरदासपुर के कादियां में हुई थी शादी, हर साल रिन्यू करवाना पड़ता था वीजा

ताहिरा मूल रूप से पाकिस्तान के फैसलाबाद की रहने वाली है। वर्ष 2003 में उसकी शादी कादियां के मकबूल अहमद से हुई थी। पति मकबूल के पिता मंजूर अहमद पाकिस्‍तान के सियालकोट को 1947 में अलविदा कह भारत के कादियां (गुरदासपुर) में बस गए थे। ताहिरा के पति कादियां में दवाइयों के विक्रेता हैं। उनकी दो बेटियां व एक बेटा है।

ताहिरा ने बताया कि वर्ष 2003 में शादी के बाद आठ माह का वीजा मिला था। उसके बाद लगातार हर वर्ष साल-साल का वीजा मिलता रहा। वर्ष 2011 में देश में पक्की नागरिकता लेने के लिए आवेदन दिया। लेकिन,  इस प्रक्रिया को पूरा होने ने में पांच साल लग गए। वर्ष 2017 में उसने पंजाब विधानसभा चुनाव में अपना वोट डाला था, लेकिन लाेकचुनाव में पहली बार वोट डालने का मौका मिला है।

ताहिरा कहती हैं, मैं उसे ही वोट दूंगी, जो देश हित के बारे सोचता है। मन में थोड़ा गुस्सा है कि वीजा प्रणाली को सरल क्यों नहीं बनाया जाता। क्यों नहीं दोनों देशों के रिश्ते में सुधार आता? अगर रिश्तों में सुधार आता है, तो दोनों देश की जनता को एक-दूसरे के वतन में जाने के लिए आसानी हो जाएंगी। व्यापार से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ताहिरा ने बताया कि उसे अपने परिवार व अहमदिया समाज की तरफ से पूरा आदर दिया जाता है। हर मुश्किल काम में सहयोग मिलता है।

किरण केस में लिखी थी सीएम को चिट्ठी

ताहिरा के परिवार ने उन पाकिस्तानी परिवारों की भी मदद की, जिनके बच्चों की शादियां भारत में हुई हैं। ताजा मिसाल सियालकोट की रहने वाली किरण की है। कुछ माह पहले हरियाणा के एक गांव तेपला के रहने वाले परविंदर के साथ हुई थी। उस मामले में किरण को भारत सरकार की तरफ से वीजा 45 दिनों का मिला। उसके बाद ताहिरा के पति ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को चिट्ठी लिख उनसे किरण का एक साल के वीजा  की मांग की।