31 मार्च की रात करनाल के मधुबन में बनाए गए प्लेस आफ सेफ्टी में बाल बंदियों ने इसी तरह तोडफ़ोड़ करते हुए सारे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे। इतना ही नहीं वहां बाल बंदियों ने आग तक लगा दी थी। साथ ही साथ टेलीविजन इत्यादि भी तोड़ दिए गए थे। लेकिन इस घटना के बावजूद राज्य बाल संरक्षण आयोग, राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी का परिणाम रहा कि अंबाला में दोबारा घटना दोहराई गई। इतना ही नहीं यहां भी अधिकारियों ने इस पर पर्दा डालना चाहा।

नहीं पहुंचाया अस्पताल
घायल बाल बंदियों को अस्पताल पहुंचाने की बजाए अधिकारियों ने पैरासिटामोल की गोलियां खिलाकर मामले पर पर्दा डालना चाहा। पुलिस की पिटाई से घायल बाल बंदी रात भर दर्द से कराहते रहे। कुछ बाल बंदियों की पीठ पर छाले पड़े थे तो कुछ के पैरों पर फ्रैक्चर आया था। इसी कारण वह सूजे हुए थे।


मीडिया कर्मियों से मिली सूचना
मुझे मीडिया कर्मियों से ही सूचना मिली थी। इसके बाद मैंने आयोग की चेयरमैन के आदेशों पर बाल सुधार गृह का निरीक्षण किया। बाल बंदियों से बातचीत भी हुई। काफी बाल बंदियों के चोटें आई हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की है। मैंने डीपीओ को सूचना दे दी थी लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। इसीलिए मैंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर आयोग को भेज दी है।