सूरत. स्मीमेर अस्पताल के डॉक्टरों ने एक मरीज के पेट में पानी से भरी थैली समझ कर ऑपरेशन किया तो 15X15 सेमी का कपड़ा निकला। यह कपड़ा 11 महीने से मरीज के पेट में था। मरीज ने बनारस में एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराया था। वहीं के डॉक्टरों नेे ऑपरेशन के बाद यह कपड़ा छोड़ मरीज के पेट में छोड़ दिया था।


11महीने तक दर्द से कराहता रहा मरीज
मरीज पेट में इतना बड़ा कपड़ा होने के कारण 11 महीने से दर्द से परेशान था। गुरुवार को स्मीमेर के सर्जरी विभाग में सफल ऑपरेशन होने के बाद उसे राहत मिल गई। कुछ दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। स्मीमेर अस्पताल के डॉक्टरों ने बनारस के उस अस्पताल से केस पेपर और फाइल मंगवाया है, जिसने मरीज के पेट में कपड़ा छोड़ दिया। 


पित्ताशय में सड़न बताकर डॉक्टरों ने की थी सर्जरी 
सूरत में अमरोली कोसाड में रहने वाला 30 वर्षीय अखिलेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का है। उसे एक साल पहले पेट में दर्द हुआ तो पहले घर के पास के डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं हुआ तो बनारस के एक निजी अस्पताल गया। वहां डॉक्टरों ने पित्ताशय में सड़न बताकर ऑपरेशन किया और खून साफ करने वाला कपड़ा उसके पेट में ही छोड़ दिया। उसके बाद समस्या और बढ़ गई। उसे पेट दर्द के साथ खाना हजम नहीं हो रहा था। बाद में वह सूरत आ गया। वह एम्ब्रॉयडरी के कारखाने में काम करता है। कुछ दिन पहले ही उसकी तकलीफ बढ़ गई तो परिजन स्मीमेर अस्पताल लेकर चले आए। 


मरीज की जान भी जा सकती थी 
स्मीमेर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह की गलती से मरीज की जान भी जा सकती थी। ऐसी गलती कैसे हुई इसके लिए बनारस के उस अस्पताल से रिपोर्ट मंगाई गई है। ऑपरेशन के दौरान सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट, दस्ताने, सिरिंज जैसी चीजें पेट में ही छूटने का खतरा रहता है। यह गंभीर गलती है। स्मीमेर अस्पताल में यह पहला मौका है जब किसी मरीज के पेट से कपड़ा निकाला गया हो। 

सीटी स्कैन में दिखी पानी की थैली जैसी चीज 
सीटी स्कैन किया गया तो पेट में पानी की थैली जैसी कोई चीज दिखी। गुरुवार को डॉ. अर्चना नेमा और डॉ. दीपक वरिया के साथ दो घंटे ऑपरेशन किया तो उसके पेट से 15X15 सेमी का कॉटन का कपड़ा निकला। इसकी वजह से आंतों में सड़न पैदा हो गई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत ठीक है।