हरियाणा के वरिष्‍ठ नेता बीरेंद्र सिंह की अगली पीढ़ी ने परिवार की राजनीतिक विरासत संभालने है। बीरेंद्र सिंह के आइएएस बेेटे बृजेंद्र सिंह हिसार सीट से लोकसभा चुनाव में उतर कर अपना राजनीतिक सफर शुरू करेंगे। उनका यह सफर पिता वीरेंद्र सिंह के केंद्रीय मंत्री पद और राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफे के 'ब‍लिदान' से शुरू हुआ है। अब हिसार की जनता बृजेंद्र के राजनीतिक तकदीर का फैसला करेगी, लेकिन वह दीनबंधु सर छोटूराम की राजनीति विरासत की अगली कड़ी बन गए हैं।

दीनबंधु छोटू राम व बीरेंद्र सिंह की राजनीतिक विरासत संभालेंगे बृजेंद्र सिंह

आइएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह रिटायरमेंट से करीब 13 साल पहले ही नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आए हैं। वह चंडीगढ़, फरीदाबाद और पंचकूला में जिला उपायुक्‍त (डीसी) रह चुके बृजेंद्र सिंह ने 21 साल की सेवाओं के बाद वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के लिए आवेदन कर दिया है।

 21 साल की सेवाओं के बाद 13 साल पहले ही सरकारी सेवाओं को कहा अलविदा

73 साल के हो चुके बीरेंद्र सिंह भाजपा में किसी पद पर नहीं रहेंगे, लेकिन सक्रिय राजनीति करते रहेंगे। वैसे उनकी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा अब भी जवान है। वह कहते हैैं कि सिर्फ विधायक या मंत्री बनकर रह जाने से काम नहीं चलता। राजनीति में इच्छाएं होना जरूरी है। राजनीति का यही पाठ वह अपने बेटे बृजेंद्र सिंह को पढ़ा रहे हैैं।


बृजेंद्र सिंह ने कुछ समय पहले कहा था कि वह आइएएस की नौकरी में सिर्फ इसलिए आए थे, ताकि कोई यह न कह सके कि नेता के बेटे को कुछ नहीं आता। राजनीति उनके खून में बसी है और अब वह आइएएस की नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति करेंगे। उनकी मां प्रेमलता भी उचाना से भाजपा की विधायक हैैं। बीरेंद्र सिंह के अनुसार जिस तरह से उन्होंने अपने नाना दीनबंधू सर छोटू राम की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है, अब बृजेंद्र सिंह मेरी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगा।
विदेश टूर की राशि जमा करानी पड़ेगी

आइएएस बृजेंद्र सिंह को तमाम क्लीयरेंस के बाद ही केंद्र व राज्य सरकार से वीआरएस मिलेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों बृजेंद्र सिंह विदेश में एक साल के एजुकेशन टूर पर गए थे। अब चूंकि बृजेंद्र सिंह वीआरएस ले रहे हैैं तो इस पूरे टूर की खर्च राशि उन्हें जमा करानी पड़ सकती है।
21 साल दी सेवाएं, 13 साल की सर्विस अभी बाकी

बृजेंद्र सिंह हरियाणा काडर के 1998 बैच के आइएएस हैं। वर्ष 1972 में जन्मे बृजेंद्र सिंह चंडीगढ़, पंचकूला और फरीदाबाद में डीसी रहे और फिलहाल हैफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। बीरेंद्र सिंह उन्हें एक दशक से राजनीति में लाने के लिए प्रयासरत रहे थे।

पिछले लोकसभा चुनावों में भी दोनों पिता-पुत्र कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। इसके बाद बीरेंद्र सिंह भाजपा में शामिल हो गए थे और राज्यसभा सदस्य तथा केंद्रीय मंत्री बने। दो बच्चों के पिता बृजेंद्र सिंह अब स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा के टिकट पर राजनीतिक पारी का आगाज करेंगे। उनकी रिटायरमेंट वर्ष 2032 में होनी थी।