सूरत. 13 अप्रैल को सारोली के पूणा-कुंभारिया रोड स्थित नेचरवैली अपार्टमेंट की 12 वीं मंजिल (120 फीट) से 13 वर्षीय हेतल नीचे गिर गई थी। उसकी कमर, हाथ-पैर, सिर और अन्य जगहों पर कुल 18 इंजरी हुई, फिर भी वह बच गई। कैसे बची? इसे वैज्ञानिक तरीके से समझें। 


एक्सपर्ट व्यू प्रफुल्ल देसाई, प्रोफेसर, फिजिक्स 
न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार क्रिया के हिसाब से प्रतिक्रिया होती है। इस मामले में बच्ची क्रिया थी और टिन शेड प्रतिक्रिया। अब शेड की इतनी क्षमता नहीं थी कि वह बच्ची का भार सह सके, इसलिए वह फट गया। शेड की प्रतिक्रिया उस बल से कम हो गई जिस बल से बच्ची नीचे गिर रही थी। अगर शेड बच्ची के बल के बराबर प्रतिक्रिया देता और नहीं फटता तो उसकी मौत निश्चित थी। 12वीं मंजिल से 120 फीट नीचे गिरने के बाद शेड की प्रतिक्रिया बहुत ही पावरफुल होती और आमतौर पर मानव शरीर में इतना झेलने की क्षमता नहीं होती। 

शरीर की हालत

  • 1 हाथ की हड्‌डी दो जगह से टूट गई है। दूसरे हाथ में भी माइनर इंजरी और फ्रैक्चर है। 
  • 18 इंजरी: कमर के साथ हाथ-पैर टूटे, सिविल में पहला ऑपरेशन सफल रहा 
  • 2 सीने की कई हडि्डयां भी टूट गई हैं। फेफड़े में पानी और खून के थक्के जम रहे हैं। 
  • 3 रीढ़ की हड्‌डी पूरी तरह से डैमेज हो गई है। छोटे-छोटे पार्ट में हडि्डयां टूटी हैं। 
  • 4 हिप पर बाहरी और इंटर्नल कई इंजरी हुई हैं। कमर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। 
  • 5 पैरों में तीन से चार माइनर फ्रैक्चर के साथ कई इंजरी हुई हैं। सूजन भी हो गई है।