मऊ । विकास खंड रतनपुरा के पशु चिकित्सालंय  को जिला प्रशासन की ओर से उसे आवारा पशुओं का अस्थाई पशु आश्रय केंद्र बनाया जाना पशुओं के लिए अभिशाप साबित हुआ। जिम्मेदारों की ‘‘चाल’’ अधिकांश पशुओं के लिए ‘‘परेशान करने वाली’’ साबित हुई। ‘‘चारे’’ और ‘‘पानी’’ के अभाव में अधिकांश गायब हो गए तो ‘‘जिम्मेदार’’ कारोबारी बन गए। चालिस गौ वंश आश्रय केंद्र से लापता है। विभाग ‘‘लोगों’’ के कंधे का इस्तेमाल कर चालिस पशुओं का आश्रय केंद्र से गायब होने के ‘‘निवाले’’ को ‘‘निगलना’’ चाहता है। 
विभागीय सूत्रों के अनुसार फरवरी माह में जिला प्रशासन की ओर से विकास खंड रतनपुरा के पशु अस्पताल को अस्थाई रूप् से आश्रय केंद्र बनाया गया था। इस आश्रय केंद्र में कुल 180 प्शुओं को प्शु अस्पताल में आश्रय दिया गया था। बीते कुछ दिनों से इलाके के आश्रय केंद्रों के प्शुओं के मरने के बाद उनकी चमडियों को बेचने की सुगबुगाहट से इलाके के लोगों में ‘‘जिम्मेदारों’’ की ‘‘चाल’’ को लेकर आक्रोश देखने को मिला कि ‘‘जिम्मेदार’’ खुद को सवालों के उत्तर के लिए तैयार करने में कलम चलाते देखे गए। वहां के पशु चिकित्सक ने एजेंसी से बातचीत में बताया कि करीब 15 रोज पहले आश्रय केंद्रों में मौजूद गौवंशों की सुरक्षा के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया। पुलिस ने मामले का संज्ञान नही लिया। पुलिस की लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण ‘‘लोग’’ आश्रय केंद्र में घुस कर आश्रय केंद्र का दरवाजा खोल दिए जिसके कारण केंद्र के करीब-करीब 40 गौवंश मौके का लाभ लेने में सफल गए। चिकित्सक से जब केंद्र में आकर प्शुओं को भगाने वालों के बारे जानकारी चाही गई तो चिक्तिसक कुछ भी बोलने से इनकार करते हुए मामले मे थाने में तहरीर देने की बात कही। थानाध्यक्ष हलधरपुर ने एजेसी से बातचीत में कहा कि उन्हें बीते 12 तारिख को एक तहरीर मिली है। मामले में जांच की जा रही । आरोपियों के बारे में जानकारी मांगने पर एसओं ने कहा कि इलाके के किसी ‘‘एक व्यक्ति’’ को आरोपी बनाया गया है। जिला स्तर पर मामले में जांच की जा रही है। जांच के बाद मामले में कार्यवाही की जाएगी। बहरहाल गोवंशों को आश्रय केंद्र से लापता होने के खेल में अधिकारी कलम लेकर एक दूसरे को बचाने में कूद गए है। इसमें पुलिस महकमा भी पदीय अधिकारों की आड़ में मनमानी करते हुए जिम्मेदारों को बचाने की ओर है। अब तक जिलाधिकारी  और उपजिलाधिकारी ने मौके का जायजा लिया है।देखना है आश्रय केंद्रों से लापता 40 गौवंशों को लेकर अधिकारिक जांच में रिपोर्ट किस ओर बैठती है?